कोरोना संकट में पिछले साल छोड़े बंदी नहीं लौटे फिर पैरोल पर छोड़ने की तैयारी

by bharatheadline

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच एक बार फिर बंदियों को अंतरिम जमानत और पेरोल पर रिहाई शुरू हो गई। मंगलवार को 65 बंदियों को अन्तरिम जमानत दी गई है। पिछले साल पेरोल पर छोड़े गए आधे कैदी अभी जेल में नहीं लौटे थे कि एक बार फिर पेरोल वाले कैदियों की लिस्ट बनाकर शासन को भेजी जा रही है। इसके अलावा अर्थ दंड न जमा कर पाने की वजह से जो कैदी जेल में सजा काट रहे हैं उनका अर्थ दंड जमा कराकर उनकी रिहाई की भी तैयारी है।
गोरखपुर जेल में वर्तमान समय में 1900 के करीब बंदी जेल में बंद हैं। यहां अगर कोरोना फैला तो एक बड़ा विस्फोट होगा। यही वजह है कि अब एक बार फिर बंदियों को अंतरिम जमानत और कैदियों को पेरोल पर रिहाई की तैयारी शुरू हो गई। मंगलवार को तो कोरोना की वजह से राजेश यादव नामक एक बंदी की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद तो और ज्यादा हड़कम्प मच गया। यही वजह है कि पेरोल वाले कैदियों की लिस्ट बनाई जा रही है। इसमें सात साल से कम सजा वाले कैदियों के साथ ही बुजुर्ग और बीमार कैदियों को भी शामिल किया जा रहा है। लिस्ट शासन को भेजी जाएगी और वहां से निर्देश के बाद पेरोल पर कैदियों को रिहा किया जाएगा।

पिछले साल के छह कैदी नहीं लौटे
पिछले साल कोरोना महामारी में ही 26 सजायाफ्ता कैदियों को आठ हफ्ते की पेरोल मिली थी। वहीं लगभग 250 विचाराधीन बन्दियों को अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था। बाद में पेरोल अवधि समाप्त होने पर 20 कैदी ही जेल वापस आए। अभी भी छह पुराने कैदी जेल नहीं लौटै हैं।

अंतरिम जमानत पर रिहा हुए 65 बंदी
मंगलवार की देर शाम मंडलीय कारागार में निरुद्ध 65 बन्दियों को अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया। इन विचारधीन बन्दियों को जिला जज के निर्देश पर न्यायालय ने 60 दिन यानी की अंतरिम जमानत दी है। सभी बन्दियों को पुलिस अभिरक्षा में घर भिजवाया गया। ये सभी बन्दी ऐसे अपराध में निरुद्ध थे जिस अपराध में सात साल या उससे कम की सजा होती है।

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