साइंस भूल गए इसलिए नहीं निकाल पाए कैप्सूूल से ऑक्सीजन, जानिए किसने कुछ घंटे मेें अनलोड करा दिए सारे टैंकर

by bharatheadline

लखनऊ में दूसरे राज्यों से आए 73 मीट्रिक टन ऑक्सीजन टैंकरों-कैप्सूल को खाली न करा पाने की चर्चा दिल्ली तक हुई। आला अफसर उपकरण ढूंढवाते रहे लेकिन समस्या कुछ और थी। हिन्दुस्तान ने उस युवा इंजीनियर को ढूंढ निकाला जिसने क्रायोजेनिक टैंकरों और कैप्सूल से ऑक्सीजन खाली करवाई।
कपूरथला के पास चांदगंज में फायर, गैसेज का कार्य कर रहे रोहन ने बताया कि उनके पास उस फर्म से फोन आया जिसने ऑक्सीजन सिलेंडर भिजवाए थे। रेलवे स्टेशन पर वैगन खड़े थे। बड़ी संख्या में अफसरों से लेकर विभागीय इंजीनियर घेरे हुए थे। कुछ स्थानीय मैकेनिक भी जुगाड़ ढूंढ रहे थे। जब रोहन ने पास जाकर दोनों टैंकरों की क्षमताओं का आकलन किया तो कहानी समझ में आ गई।

इस तरह निकली ऑक्सीजन
चारबाग यार्ड में खड़े क्रायोजेनिक टैंकर आकार में छोटे थे। दूसरी तरफ उनसे गैस जिन टैंकरों में भरी जानी थी वे विशालकाय थे। ऑक्सीजन इसलिए अनलोड नहीं हो पा रही थी क्योंकि प्रेशर बराबर नहीं मिल रहा था। छोटे टैंकर से बड़े टैंकर तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए छोटे टैंकर का प्रेशर यानी दबाव ज्यादा होना चाहिए। आकार के लिहाज से बड़े टैंकर का दबाव अधिक था तो गैस उसमें नहीं भर रही थी। क्रायोजेनिक टैंकरों में लगे वेपराइजर को चालू कर उसका प्रेशर उन्होंने बढ़ाया। दूसरी तरफ रोड टैंकर का दबाव कम किया गया। प्रेशर का संतुलन ठीक होते ही तेजी से ऑक्सीजन गैस दूसरे टैंकरों में भरने लगी।

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