जिले में लॉकडाउन से लगातार बढ़ रही कालाबाजारी, कारोबारियों ने राशन सामग्री के बढ़ाए दाम,जिला प्रशासन कालाबाजारी पर रोक लगाने में हुआ नाकाम साबित

by bharatheadline

रायगढ़. प्रदेश के साथ-साथ जिले में लॉकडाउन की घोषणा के बाद रायगढ़ जिले में कालाबाजारी शुरू हो गई है। कालाबाजारी का सीधा असर राशन सामग्री पर देखा जा रहा है। परचून विक्रेताओं ने सामानों के डेढ़ से दोगुना रेट बढ़ा दिए हैं। इसका सीधा असर गरीब, किसान, मजदूर और आमजन पर देखा जा रहा है।
जिले के शहर और कस्बों में स्टॉक करने वाले थोक विक्रेताओं ने रेटों में भारी इजाफा किया है। जिला प्रशासन के द्वारा एक दो जगहों में छापामार कार्रवाई की गई। लेकिन उसके बावजूद जिला प्रशासन कालाबाजारी पर रोक लगाने में नाकाम साबित हो रहा है। थोक व्यापारी छोटे दुकानदारों को डेढ़ से दोगुनी रेट पर सामान बेच रहे हैं, जिससे छोटे व्यापारियों की ओर से आम ग्राहक को सामान करीब दोगुनी रेट में बेचा जा रहा है. वहीं, जिला प्रशासन ने गाइडलाइन जारी कर कालाबाजारी रोकने के लिए टीम का गठन भी किया है, लेकिन कालाबाजारी के लिए गठित की गई टीमों की ओर से अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे मुनाफाखोरी के हौसले बढ़ते जा रहे हैं।
शहर के स्थानीय नागरिक रोशन दीक्षित ने बताया कि 14 अपै्रल से लगातार बढ़ते लॉकडाउन से कालाबाजारी को बढ़ावा मिला है. दाल, चावल, मसाला, आटा, घी, तेल, आलू, प्याज, हरी सब्जी के अलावा पान मसाला, सिगरेट, गुडाखू, चिकन आदि पर दुकानदारों ने रेट बढ़ा दिए हैं। उनका कहना है कि मुनाफाखोरी और कालाबाजारी का कारोबार जिला प्रशासन की आंखों के सामने फल-फूल रहा है। प्रशासन की आंखों के सामने धड़ल्ले से कालाबाजारी हो रही है। जिला प्रशासन के द्वारा गठित की गई टीमों की ओर से शहर के एक-दो गोदाम को छोड़कर दूसरी कार्रवाई अभी तक अमल में नहीं लाई गई है, जिसका खामियाजा गरीब, किसान व मजदूर लोगों को भुगतान पड़ रहा है। वहीं रायगढ़ एसडीएम युगल किशोर उर्वसा का कहना है कि मामले की शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई की जाती है, अभी तक कई मामले भी दर्ज किए जा चुके हैं।

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