पीपल के पेड़ खोल रहे मौत के आंकड़ों की सच्चाई, जानिए कैसे

by bharatheadline

उफ…ये पेड़ भी रो रहा है: इसे परंपरा का घंट कहें या खतरे की घंटी जो पीपल के पेड़ में मोक्ष की आश से लटकाए गए हैं। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद दाह संस्कार करके मृतक की स्मृति में पीपल के पेड़ में एक घट बांधा जाता है। जिसमें प्रतिदिन मृतक की आत्मा को तिलांजिल और जल दिया जाता है।
मुरादाबाद के लोकोशेड मोक्ष धाम के पास स्थित पीपल के पेड़ में भी इसी तरह के घंट बांधे जाते हैं। लेकिन क्रूर कोरोना काल में हो रही बेतहासा मौत के बाद ऐसा लग रहा है कि पीपल का पेड़ भी अब इन घटों का बोझ नहीं उठा पा रहा। पेड़ भी रो रहा है। यहां पीपल के पेड में शुक्रवार को 70 से अधिक घंटे बंधे मिले। वहां मौजूद देखरेख करने वाले सोनू ने बताया कि प्रतिदिन 20 से 25 घंटे फोड़े जाते हैं। कुछ लोग दस दिन पूर्ण होने पर और कुछ लोग तीन दिन में ये घंट फोड़ देते हैं। बीते करीब बीस दिन से आलम यह है कि पीपल के पेड़ में घंट लटकाने के लिए जगह नहीं बची है।

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