कंपाउंडर से लेकर डॉक्टर तक करते रहे गंदी हरकतें, पति की मौत पर महिला का फूटा गुस्सा

by bharatheadline

होली के मौके पर पति संग नोएडा से भागलपुर आयी महिला को क्या पता था कि इस बार का रंग उसके माथे के सिंदूर को ही मिटा देगा। महिला ने करीब एक माह तक तीन अस्पतालों में पति को भर्ती कराते हुए पैसे से लेकर इज्जत तक गंवायी, लेकिन डॉक्टर-कंपाउंडर और अस्पतालों की अव्यवस्था से उसके पति की मौत हो गई। एक माह के दौरान कई बार अस्पतालों के डॉक्टरों से लेकर कंपाउंडर तक ने महिला से गंदी हरकतें कीं। पति को बचाने के लिए पत्नी सबकुछ सहती रही। जब पति की मौत हुई तो महिला ने सबको बेनकाब करने की ठान ली।

ग्लोकल हॉस्पिटल में पति के सामने ही कंपाउंडर ने दुपट्टा खींचा, कमर में हाथ डाला
मधुबनी जिला निवासी एक व्यक्ति नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था। वह अपनी पत्नी संग होली में आयोजित गेट टू गेदर फेमिली कार्यक्रम में शरीक होने के लिए भागलपुर निवासी अपने एक रिश्तेदार के घर आया था। इस दौरान सॉफ्टवेयर इंजीनियर कोरोना संक्रमित हो गया। दो से तीन बार रैपिड एंटिजन टेस्ट किट से जांच करायी गयी तो निगेटिव निकले। फिर आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल दिया गया, जिसकी रिपोर्ट 10 दिन बाद मिली। पति की तबीयत खराब हुई तो 16 अप्रैल को ग्लोकल हॉस्पिटल में भर्ती कराया। पति की एचआरसीटी रिपोर्ट में 60 प्रतिशत फेफड़ा संक्रमित पाया गया। इस दौरान डॉक्टर व नर्स न तो पति को देखने जाते थे और न ही किसी को अंदर ही रहने देते थे।
महिला ने आरोप लगाया गया कि ग्लोकल हॉस्पिटल में उनके पति दो से तीन घंटे से मल किये बेड पर लेटे पड़े रहे। इसकी जानकारी जब स्टाफ को दी तो कोई आगे नहीं आया। यहां पर तैनात पुरुष कंपाउंडर ज्योति कुमार सहायता करने की बात कही और पति के सामने ही छेड़खानी की नीयत से दुपट्टा खींच लिया। यहां तक कि मेरे कमर में हाथ तक डाल दिया। मेरे छह फीट दो इंच के पति बेबस देखते रहे।
डॉक्टर ने पति के लिए रेमडेसिविर का इंजेक्शन लगवाने को कहा। व्यवस्था की तो एक दिन रेमडेसिविर का इंजेक्शन लगाते हुए डॉक्टर ने वायल नीचे गिरा दिया। एतराज किया तो डॉक्टर बोला कि 50 हजार का भी सामान होता और मैं गिरा देता तो तुम मेरा कुछ नहीं कर पाते। इंजेक्शन लगने के बाद पति की तबीयत नहीं सुधरी तो 23 अप्रैल को रेफर करने के बाद उन्हें लेकर मायागंज अस्पताल गयी।

मायागंज आईसीयू की नर्स बोली मुझे नहीं मरना है, डॉक्टर बंद-अंधेरे कमरे में देख रहे थे मूवी
महिला ने बताया कि उनके पति को मायागंज अस्पताल की आईसीयू में 23 अप्रैल को भर्ती कराया गया। इस दौरान नर्सों को कुछ करने को बोला जाता था तो वे कहती कि उन्हें मरना थोड़े हैं। ये कहकर मुंह फेर लेती थी। 25 अप्रैल की रात पति ऑक्सीजन बिना तड़पने लगे। नर्सों को बोला तो नहीं सुनी। डॉक्टर के कमरे में गयी तो वह बंद व अंधेरे कमरे में लेटकर मोबाइल पर मूवी देख रहे थे। जब चिल्लाई तो एक डॉक्टर वहां से निकला और पति के बेड के पास पहुंचा तो देखा कि मास्क तो लगा है, लेकिन पाइप नहीं लगाया गया है। ऑक्सीजन मिला तो पति को राहत मिली, लेकिन अगली सुबह पति बोले, अब यहां से ले चलो। महिला ने आरोप लगाया कि मायागंज अस्पताल में कोई सीनियर डॉक्टर राउंड नहीं करते हैं। बीएचटी पर फर्जी तरीके से नेबुलाइजर, फिजियोथेरैपी, राउंड व जांच आदि लिख दिया जाता है।

पटना के डॉक्टर करते थे गंदे-गंदे इशारे, मेरे बदन को रगड़ते हुए निकलते थे
26 अप्रैल को पति को मायागंज अस्पताल से रेफर कराने के बाद पटना ले गई। कहीं जगह नहीं मिली तो उसी दिन उन्हें चार घंटे तक मल भरे बेड पर राजेश्वर हॉस्पिटल पटना में लिटाये रखा गया। बहुत कहने के बाद पति को बेड तो मिला, लेकिन ऑक्सीजन का संकट हो गया। बार-बार जानबूझकर पाइपलाइन को बंद कर दिया जाता था, ताकि मरीज मजबूर होकर ऑक्सीजन खरीदने पर मजबूर हो जाये। पति की सेवा कर, खरीदे गये ऑक्सीजन को चढ़वा व दवा के बूते पति को बहुत हद तक रिकवर कर लिया था, लेकिन आठ मई की अलसुबह ऑक्सीजन आपूर्ति जानबूझकर बंद कर दी गई। कई घंटे तक पति ऑक्सीजन के बिना तड़पते रहे। सिलेंडर का ऑक्सीजन भी खत्म हो गया। आखिरकार पति ने आठ मई की अलसुबह दो बजे दम तोड़ दिया। महिला ने आरोप लगाया कि राजेश्वर हॉस्पिटल का चिकित्सक डॉ. अखिलेश उन्हें गंदे-गंदे इशारे करता था। जब चलता था तो मेरे बदन को रगड़ते हुए निकलता था। पति का इलाज कराना था तो मजबूर थी। कोई और समय व स्थान होता तो डॉक्टर को चप्पल निकाल कर मारती।

वार्ड अटेंडेंट को कर दिया गया सस्पेंड, जांच चल रही है: ग्लोकल हॉस्पिटल
ग्लोकल हॉस्पिटल के मैनेजर अमित कुमार ने बताया कि आरोपी वार्ड अटेंडेंट ज्योति कुमार के खिलाफ निलंबन पत्र निकाला जा चुका है। अस्पताल का सीसीटीवी फुटेज खंगाला जा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने एक कमेटी का गठन कर दिया है जो इस मामले की जांच कर रही है। अगर जांच में आरोप सही पाया गया तो महिला से आवेदन लेकर दोषी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी।

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