हम सुधरेंगे तभी जनजीवन सामान्य होगा : अकरम खान

by bharatheadline

छत्तीसगढ़ बैडमिंटन संघ के उपाध्यक्ष , राष्ट्रीय खिलाड़ी एवम कवि अकरम खान ने मानव जाति के जीवन पर आए करोना रूपी संकट पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा है की मानव जाति का जो जान माल का जो नुकसान हुआ है और हो रहा है , ये बहुत ही पिड़ादायक और दर्दनाक है । हमने विगत वर्षो और दिनो में बहुत से अपने को देखा है और खोया है । आज मिला इंसान कुछ ही दिनों में काल की गोद में सोया है । पहले का लॉक डाउन एक उत्सव की तरह लोगो ने अपनाया था बाद में समय बढ़ने पर घर जाने की आपा धापी मची थी । कुछ लोग पहले इस बीमारी के प्रति गंभीर हुए , कुछ असमंजस में थे । मीडिया ने भी कमाल की बैटिंग और फील्डिंग खुद ही की थी , जो की सर्वविदित है । अब जब की सारा दृश्य सामने है करोड़ों लोगो ने दूरियां बनाने , मास्क पहेन्ने , सेनिटाइजर का उपयोग करने को समझा तो लाखों लोगो ने इसे हल्के में लिया , लापरवाहियां बरती जिसका खामियाजा हम भुगत रहे है । प्रशासन को दिखाने मात्र मास्क लगाते थे और आगे जाकर उतार देते थे । ऐसे लगता था कि कोई इन्हे जबरन मास्क पहना रहा हो , आजादी छीन रहा हो । प्रत्यक्ष नजारा सड़को , दुकानों पर आम दिखता था । पान , गुटका , पाउच वालो ने तो हद ही कर दी थी , उनके चेहरों पर मैला कुचैला मास्क दिखता था । सड़को पर टूटा हुआ , यूज किया हुआ मास्क देखने को मिलता था । इस महामारी से लड़ने के लिए युद्ध स्तर पर खोज की जा रही थी । शासन के गाइडलाइन अनुसार उपलब्ध दवाइयों के द्वारा संक्रमित व्यक्तियों का उपचार किया जा रहा था। करोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए लॉकडाउन लगाना मजबूरी था और कोई उपाय भी नही था , और आम जनजीवन को पटरी में लाने लॉकडाउन खोलना भी मजबूरी थी । बीच का व्यक्ति सफर कर रहा है । धीरे धीरे लॉकडाउन खोला गया , लोग काम करने काम कराने , दुकान खोलने , मीटिंग आयोजन करने , शादी पार्टी करने , पार्क घूमने , तीन सवारी गाड़ी चलाने , इक्कट्ठे बैठकर गप लड़ाने , हाथ मिलाने , झुंड लगाकर खरीदारी करने , एक जगह से दूसरी जगह जाने , अनेक काम , लापरवाही पूर्वक करने लगे थे । ऐसा लगने लगा की बरसात की बारिश की तरह करोना आया और चला गया । अब किसी छाते की जरूरत नहीं है । इस तरह के जानबूझ कर मनमर्जी लापरवाहीपूर्वक कार्य करने वालो को समझना होगा कि जो हो रहा है वो उनकी भलाई के लिए हो रहा है । सरकार एक तंत्र है उसमे काम करने वाले , नियम बनाने , बचाव करने वाले भी इंसान हैं , भगवान नही हैं , उनका भी अपना एक परिवार है । उन्हें आम इंसानों को चौक चौराहों पू खड़े होकर समझाना पड़ रहा हैं। बचाव में ऐसा करो , वैसा मत करो , घर से मत निकलो , हाथ धोलो , मास्क लगालो , एक दूसरे से दूरी बना लो , पढ़े लिखे , अनपढ़ भी सभी ये बातें जान रहे हैं , समझ भी रहे हैं । पर नियम तोड़ने की अपार आनंद उन्हें प्रोत्साहित करती हैं । अब जब की पूरे देश में तेजी से बढ़ते संक्रमण के कारण दूसरी बार लॉकडाउन लगाया गया हैं तब तक लोगो ने अपनी सारी सीमाएं पार करदी हैं । जानते बूझते छोटे बड़े आयोजन , चुनावी रैलियों ने करोना रूपी प्रसाद लोगो तक भरपूर मात्रा में पहुंचाया हैं । सैकड़ों , हजारों का संक्रमण लाखों में पहुंच चुका हैं । अब जब की वैक्सिन आ गई है और लोगो को उम्र अनुसार लगाया भी जा रहा हैं । सब को अपनी अपनी पारी का इंतजार है । मौतें हो रही है शमसान और कब्रिस्तान में लाइन लगी हैं । बढ़ती मौतें को रोकने संसाधन जुटाने कवायत जारी है । जिला प्रशासन , पुलिस प्रशासन , स्वास्थ विभाग , समाज सेवी संस्थाएं , मुस्तैदी से अपना काम कर रहे हैं । पर आंकड़े मेंढको को तराजू में तोलने जैसा है । लोगो का छोटा , बड़ा कारोबार सभी बंद हैं । राशन पानी के लाले पड़े हुए हैं । मध्यम और गरीब वर्ग हैरान , परेशान हैं । किसी को कुछ सूझ नही रहा हैं की इस स्थिती में क्या करे कहाँ जाए । इस परेशानी को पैदा करने का कारण भी एंग्री यंग मैन बनकर घूमने वालों की तादात ज्यादा हैं । अब हमे आत्मचिंतन करते हुए शपत लेना होगा की हम है तो घर है , परिवार है , पत्नी है , बच्चे है , बुजुर्ग है , जिसकी जिम्मेदारी हमारी है । और ये जिम्मेदारी कोई दूसरा ले नही सकता । इस संक्रमण के चैन को तोड़ने के लिए प्रत्येक नागरिक को वालंटियर की भूमिका निभानी होगी । जब हम सुधरेंगे तो ही देश की हालत सुधरेगी । हम करोना से दवाई, दुआएं ,प्रार्थना परस्पर सहयोग देकर विजय प्राप्त कर सकते है । करोना से आजादी की इस लड़ाई में प्रत्येक नागरिक को शंखनाद करना होगा। और ये मानना होगा की कुछ वर्षो तक हमे करोना के साथ रहना है तभी हम अपने अलावा लोगो की जान बचा सकते हो । आइए हमसब मिलकर ये शपथ लेते है की जब ये लॉकडॉन खुलेगा तो करोना से बचाव संबंधी निर्देशों को अपने जीवन शैली में आत्मसात करेंगे और विपरीत कार्य करने वालो को राह चलते समझाइस देते रहेंगे और ये हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी और कर्तव्य हैं । करोना मुक्त भारत को देखने के लिए जन जन हर जन में इसके विरुद्ध राष्टृव्यापी , राष्ट्रीय हित , सकारात्मक सोच को विकसित करनी होगी , निजस्वर्थ और अवसरादिता काला बाजारी को स्वयं विवेक अंकुश लगाना होगा तभी जन जीवन सामान्य होता दिखेगा और हम फिरसे विकासशील हमारे भारत देश में नई पीढ़ी को भयमुक्त , मुस्कुराते सपनो को साकार करते हुए जीने की उमंग लिए , उज्ज्वल भविष्य को देख सकते है । उन्हें भरोसा दिला सकते हैं की अंधेरी रात के बाद भी एक सुनहरी सुबह होती है l

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