महामारी काल में घरघोड़ा नप अध्यक्ष के दबाव में चला कार्यालय, अब अधिकारी परिवार समेत कोरोना की चपेट में

by bharatheadline

सख्त निर्देशों के बावजूद भी सरकारी विभाग के अधिकारी कोरोना वायरस संक्रमण के प्रति जागरूक नजर नहीं आ रहे हैं. इसके कारण लगातार रायगढ़ के ग्रामीण इलाके कोरोना की चपेट में आ रहे हैं. इसका ताजा उदाहरण घरघोड़ा नगर पंचायत कार्यालय से सामने आया है.
दरअसल घरघोड़ा नगर पंचायत के इंजीनियर अजय प्रधान भी कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं. उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव है. उनका परिवार भी उनकी लापरवाही की सजा काट रहा है. परिवार के सदस्यों की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है. कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नगर पंचायत कार्यालय घरघोड़ा में लगातार लापरवाही बरती जा रही थी. लॉकडाउन के दौरान ऑफिस को 100% कर्मचारियों के साथ खोला जा रहा था. निर्देशों को ताक पर रखकर इंजीनियर काम कर रहे थे. नतिजतन आज इंजीनियर खुद कोरोना संक्रमण के शिकार हुए हैं. साथ ही घरघोड़ा और आसपास की ग्रामीण जनता भी लगातार कोरोना की चपेट में आ रहे हैं.
महामारी काल में क्यों जारी था सामान्य कामकाज?
घरघोड़ा नगर पंचायत कार्यलय को सब इंजीनियर अजय प्रधान ने आदेश के विपरित आम जनता के लिए खोल कर रखा. नगर में हो रहे निर्माणों की नोटिस बांटे गए. नए निर्माण कार्यों के लिए निविदा भी निकाले गए. जबकि इन कार्यों को महामारी के दौरान टाला भी जा सकता था. सुत्रों की माने तो इस दौरान जनता के पैसे का भी दुरउपयोग हुआ है. घटिया निर्माण कार्य हुए हैं. कलेक्टर रायगढ़ का स्पष्ट निर्देश है कि नगर पंचायत कार्यालयों में मूलभूत आवश्यक सेवाओं के अलावा आधे कर्मचारियों की उपस्थिति में ही कार्यालय खोले जाएंगे. बावजूद इसके कार्यलय क्यों खुला और समान्य कामकाज जारी रख जनता की जान खतरे में डालने का जिम्मेदार कौन है इसका जवाब किसी के पास नहीं है.
कोरोना के कहर पर कार्यालय की भूमिका साफ
रायगढ़ जिले में लगातार कोरोना संक्रमण फैल रहा है. घरघोड़ा और ग्रामीण इलाकों में भी आए दिन 50 से भी अधिक कोरोना संक्रमित मरीजों की पहचान हो रही है. सैकड़ों की संख्या में एक्टिव मरीज हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर 1 महीने से भी अधिक वक्त लॉकडाउन होने के बावजूद भी कोरोना संक्रमण क्यों फैल रहा है. बता दें इसके पीछे सरकारी कार्यलायों और अधिकारियों की लापरवाही भी स्पष्ट है. घरघोड़ा इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण है. कोरोना काल में आम जनता को कई विषयों पर नोटिस जारी किया गया. अधिकारी सीधे लोगों की संपर्क में आए. सबूत के तौर पर इसकी पूरी प्रमाणिक जानकारी आवाज जावक पंजी से भी प्राप्त की जा सकती है||
नगर पंचायत घरघोड़ा में आरोप प्रत्यारोप का दौर पुराना है.नगर में चर्चा अनुसार कोरोना काल मे नगर पंचायत अध्य्क्ष विजय शिशु सिन्हा ने 6 लाख रुपए कि नगद राशि कोरोना काल मे खर्च किये जाने की बात कही है जिसका ब्यौरा नगर की जनता जानना चाहती है,ज्ञात हो किअध्यक्ष विजय शिशु सिन्हा ने कार्यालय के कर्मचारियों पर काम के लिए दबाव बनाया था. ताकि कोरोना काल में आराम से जनता के पैसों पर हाथ साफ किया जा सके.नगर पंचायत के कई पार्षदों ने कार्यलाय के कामकाज को लेकर सवाल उठाए थे लेकिन काम जारी रखा गया. बिना नियमों के पालन किए कार्यालय खुलता रहा और लोग पहुंचते रहे. अधिकारी भी लोगों के पास जाते रहे. कोरोना के लिए जितने अधिकारी जिम्मेदार हैं उतने ही जिम्मेदार नगर पंचायत के वर्तमान अध्यक्ष विजय शिशु सिन्हा भी हैं.

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