कोरोना महामारी में अपनों को खोने के बाद असहाय बच्चों को मिलेगा सहारा ,रामदास द्रोपती फाउण्डेशन उठाएगी शिक्षा का खर्चा- सुशील रामदास

by bharatheadline

रायगढ़. रायगढ़ जिले में पहले सांझा चुल्हा के साथ-साथ रामदास द्रोपती फाउण्डेशन ने भूखे परिवारों को सुखा राशन के साथ-साथ भोजन के पैकेट प्रदान कर समाजसेवा में अपना अलग मुकाम बनाया और अब फिर से इस संस्था ने रायगढ़ जिले के उन अनाथ बच्चों के लिए बड़ा कदम उठाया है जिसमें कोरोना संक्रमण काल में अपनो का खो चुके मासूम बच्चों को शिक्षा से वंचित न होना पड़े।
रामदास द्रोपती फाउण्डेशन ऐसे बच्चों की सूची शिक्षा विभाग से लेगी। जिन बच्चों के मां बाप नही रहे और वे आगे पढ़ना चाहते हैं और उनके लिए पढ़ाई का पूरा खर्चा उनकी संस्था उठाएगी। यह जानकारी आज रामदास द्रोपती फाउण्डेशन के चेयरमेन सुशील रामदास ने दी। उन्होंने बताया कि कोरोना नामक महामारी के चपेट में भारत का हर नगर व गांव आया है और इससे लड़ने के लिए भी विभिन्न क्षेत्रों में लोग आगे भी आ रहे हैं। इसी तारत्मय में जिले के समाज सेवी संस्था रामदास द्रौपदी फाउन्डेशन के संस्थापक सदस्य व छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कामर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के प्रदेश उपाध्यक्ष सुशील रामदास ने बताया कि रामदास द्रौपदी फाउन्डेशन इस महामारी से असहाय हुए बच्चों को एक वर्ष की पूरी विद्यालयीन शिक्षण शुल्क को देगी। यदि किसी भी व्यक्ति को ऐसा लगता है कि इस महामारी ने किसी भी बच्चे के शीश से अभिभावक का छत्रछाया छीन लिया है और वह रायगढ़ का निवासी है। तो कोई भी व्यक्ति फाउन्डेशन के चांदनी चौक स्थित कार्यालय में सूचना दे सकता है और उसके सूचना पर वैसे छात्र – छात्राओं के वर्तमान वर्ष के विद्यालयीन शिक्षण शुल्क, फाउंडेशन द्वारा विद्यालय में जमा कराया जाएगा। साथ ही स्थिति के आकलन के अनुसार अन्य यथा संभव सहयोग भी रामदास द्रौपदी फाउंडेशन द्वारा किया जा सकता है।
ज्ञात हो कि रामदास द्रौपदी फाउन्डेशन वर्ष 2014 से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अन्य समाज सेवी संस्थानों के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण का कार्य करते आ रही है। वहीं हर वर्ष दर्जनों आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का निःशुल्क मोतिया बिंद का ऑपरेशन के साथ – साथ कई अन्य क्षेत्रों में कार्य करतेे आ रही है। साथ ही पिछला लॉक डाउन हो या वर्तमान लॉक डाउन में सूखा भोजन सामाग्री व पका हुआ भोजन पहुंचाने का कार्य भी पूरे तनमयता के साथ फाउन्डेशन द्वारा किया गया और किया जा रहा है। इसी कड़ी में समस्याओं को देखते हुए, फाउंडेशन द्वारा यह पहल शुरू किया गया है।

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