ब्लैक फंगस के बाद आया व्हाइट फंगस कितना है खतरनाक? जानिए क्या बोले डॉक्टर

by bharatheadline

पूरा देश लगातार कोरोना वायरस के साथ लड़ाई में है लेकिन इसके बीच ही कई अन्य समस्याएं है जो देश के लोगों के लिए सामने आ जाती हैं। वो चाहे ताउते तूफान हो या फिर ब्लैक फंगस जैसी घातक बीमारी। ऐसे ससमय में जब कोरोना के बाद देश के कई राज्यों में ब्लैक फंगस के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। एक और बीमारी है जो देश में अपने पैर पसारते हुए दिख रही है. यह बीमारी मुख्य रूप से इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड कोविड -19 रोगियों को प्रभावित कर रही है। यह एक अलग फंगस है जिसे व्हाइट फंगस कहा जाता है. इसने पूरे देश में एक बार फिर हलचल मचा दी है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह ब्लैकं फंगस के जितना खतरनाक नहीं है। सही समय पर इसे पहचान कर डॉक्टर के पास चले जाएं, इसको लिए शीघ्र इलाज जरूरी है जो एक से डेढ़ महीने चल सकता है। एलएनजेपी में काम करने वाले डॉक्टर सुरेश कुमार कहते हैं, व्हाइट फंगस (एस्परगिलोसिस) ब्लैग फंगस जितना खतरनाक नहीं है। इसका इलाज 1-1.5 महीने तक जारी रह सकता है इसलिए शीघ्र निदान महत्वपूर्ण है। अपने डॉक्टर की सलाह के बिना #COVID19 के इलाज के लिए स्टेरॉयड न लें।
डॉक्टर कहते हैं, “यह फंगस तंग और नम जगहों पर उगता है इसलिए सुनिश्चित करें कि आपके आस-पास नियमित रूप से सफाई हो। कई दिनों तक फ्रिज में रखी खाने की चीजों का सेवन करने से बचें, ताजे फल खाएं, अपने घर में धूप आने दें और अपने मास्क को रोजाना धोएं। व्हाइट फंगस की पहली रिपोर्ट पटना, बिहार से आई थी। हालांकि, सरकार द्वारा संचालित पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) ने इन खबरों को खारिज कर दिया।
विशेषज्ञों ने यह कहा कि इस बात का कोई आधार नहीं है कि “व्हाइट फंगस” ब्लैक फंगस से अधिक खतरनाक है। विशेषज्ञ बताते हैं कि ब्लैक फंगस इससे ज्यादा आक्रामक है जो साइनस, आंखों, मस्तिष्क को बहुत नुकसान हो सकता है और जिसके लिए बड़ी सर्जरी की आवश्यकता होती है।

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