बुनगा के एक दर्जन से भी अधिक लोग कर्नाटक में बने बंधक,पीड़ित परिवार लगा रहा है बचाने की गुहार, कलेक्टर को भी लिख पत्र

by bharatheadline

रायगढ़. रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लाक स्थित ग्राम बुनगा के एक दर्जन से भी अधिक ग्रामीण कर्नाटक के श्रीनिवासपुर गांव में बंध बने हुए हैं। ये सभी 28 फरवरी को एक ठेकेदार के माध्यम से काम की तलाश में कर्नाटक पहुंचे थे और तब से लेकर अब तक ये सभी वहां बंधक बने हुए हैं चंूकि ठेकेदार इन्हें वापस नही आने दे रहा है। पीड़ित परिवार के लोगों ने काकाजी डॉट काम के संपादक नरेश शर्मा से फोन पर गुहार लगाते हुए कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक से इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है और जल्द से जल्द उन्हें वहां से निकालने की पहल करें।
पुसौर ब्लाक के बुनगा गांव से गरीबी के चलते मजदूर बनकर गए 6 पुरूष, 6 महिलाएं व 7 बच्चे कर्नाटक के श्रीनिवासपुर में बंधक बने हुए हैं। वहां ठेकेदार बालाकृष्ण उन्हें लगातार प्रताड़ित कर रहा है। इनके एक सदस्य ने हाल ही में एक पत्र जिला कलेक्टर को भी दिया है जिसमें पीड़ित परिवार को बचाने के लिए आग्रह किया गया है। कर्नाटक से लक्ष्मीकांत बताता है कि बीते कई दिनों से उन्हें ठीक से खाना भी नही मिल रहा है और ठेकेदार लगातार काम लेते हुए प्रताड़ना भी देते आ रहा है। उसका कहना है कि फरवरी माह से अब तक कई बार वे यहां से जाने के लिए ठेकेदार को आग्रह करते आ रहे हैं लेकिन उन्हें वापस छोड़ना तो दूर बल्कि यहां पर काम करवाया जा रहा वहां बंधक बनाकर रखा गया है।
वहीं पुसौर ब्लाक के पुनीराम, सोनीनाथ सहित अन्य लोगों ने कलेक्टर को पत्र लिखा है उसमें यह बताया है कि ठेकेदार बालाकृष्ण श्रीनिवासपुर का रहने वाला है। कर्नाटक प्रदेश के अंतर्गत आने वाले इस गांव में उन्हें बलात रोका गया है। जबकि वे यहां 9-9 हजार रूपए एडवांस लेकर पोल्ट्री फार्म में काम करवाने लाया गया था और वहां ले जाने से पहले यह भी कहा गया था हर 10 से 15 दिन में उन्हें काम के बदले राशि भी मिलेगी। लेकिन वहां पहुंचते ही न पैसा मिल रहा है और न ही उन्हें वापस आने दिया जा रहा है। जिन लोगों को बंधक बनाया गया है उनका नाम मधुसुदन रजक, पद्मा रजक, दिपेश कुमार, लक्ष्मीकांत रजक, मातेश्वरी, खुशहाल, छीतीज, थकीर रजक, जमुना रजक, मयंक, दुर्बल निषाद, पार्वती, प्रियंका, संजय कुमार, कुंद्रा बरेठ, सोमेस कुमार, जत्तु बाई, ओम प्रकाश हैं जो ठेकेदार की प्रताड़ना झेल रहे हैं।
जिला कलेक्टर भीम सिंह व पुलिस अधीक्षक को चाहिए कि वे इस मामले में पीड़ित गरीब परिवार को बचाने के लिए कोई पहल करें।

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