छत्तीसगढ़ की आदिवासी महिलाओं ने भरी सभा में फरमान सुनाया, शराब बेचते पकड़े गए तो 20 हजार रुपए जुर्माना

by bharatheadline

कोरोना संक्रमण के केस कम हुए तो छत्तीसगढ़ सरकार ने शराब बेचने की छूट दे दी। देशी शराब की दुकानें तो खुल भी गई हैं। ऐसे में आदिवासी महिलाओं ने शराब के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है। गरियाबंद जिले में महिलाओं ने ग्रामीणों की बैठक लेकर बाकायदा फरमान भी सुना दिया है कि शराब बेचते पकड़े गए तो 20 हजार रुपए जुर्माना लगेगा। महिलाओं ने इसे ‘घर जोड़ो, बोतल तोड़ो, नशा छोड़ो’ का नाम दिया है।

शराब के विरोध में बुजुर्गों का सहयोग मिला तो 29 मई को बुलाई पंचायत
मैनपुर विकासखंड का राजापड़ाव गौरगांव क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य है। शराब की दुकानें खुलीं तो फिर लोगों ने पीना शुरू कर दिया। ऐसे में इस बार महिलाएं विरोध में खड़ी हो गईं। एक से दूसरे तक बात पहुंची और ग्राम पंचायत भुतबेडा, मोतीपानी, भीमाटीकरा, बाहरापारा, मोंगराडीह, भालूपानी, तेंदुछापर सहित गई गांवों की महिलाएं एकजुट होने लगीं। इसमें गांव के बड़े और बुजुर्गों का भी सहयोग मिला तो महिलाओं ने 29 मई को पंचायत कर डाली।

महिलाएं बोलीं- शराब ने संस्कार बिगाड़े, अब बेचने पर प्रतिबंध
पंचायत में महिलाओं ने कहा कि शराब ने लोगों के संस्कार बिगाड़ दिए हैं। शराब पीकर गाली-गलौज और मारपीट आम है। नशा मुक्ति के खिलाफ अब अभियान चलाया जाएगा। इसमें पुरुष भी सहयोग करें। उन्होंने कहा कि अब से गांवों में शराब बेचना प्रतिबंधित है। बैठक में निर्णय लिया गया कि शराब बेचते पकड़े गए तो 20 हजार रुपए जुर्माना लगाया जाएगा। इसमें पुरुषों ने भी सहयोग देने की बात कही है। वहीं महिला सशक्तिकरण पर भी काम होगा।

सरपंच और बुजुर्ग बोले- शराब नहीं होगी, तो गांव का विकास होगा
बैठक में वरिष्ठ नागरिक दलसूराम मरकाम, भुतबेड़ा के सरपंच ने कहा कि नशा असंतुलित और असामाजिक बनाती है। नशे में व्यक्ति विवेकहीन हो जाता है और दुर्व्यवहार करता है। इसके चलते उसका मान-सम्मान भी कम होता। आर्थिक रूप से पिछड़ता है। इसलिए निर्णय लिया गया है कि हमारे गांव में अब कोई भी शराब नहीं बनाएगा और ना बेचेगा। पूरी तरह से यह होने के बाद ही कहीं जाकर हमारे गांव का विकास हो सकेगा।

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