अनाथ बच्चों के लिए कई लोगों ने बढ़ाया मदद का हाथ, हीरे की अंगूठी से लेकर कपड़े तक किए दान

by bharatheadline

कोरोना महामारी में अपने परिजनों को खोने वाले बच्चों की मदद के लिए दिल्ली समेत देशभर से लोग मदद के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं। मदद करने वालों में कई लोगों ने हीरे की अंगूठी, सोने-हीरे जड़े पेंडेंट, चांदी के आभूषण, स्विस घड़ियां, कीमती पेंटिंग, अलग-अलग धातुओं से निर्मित मूर्तियां जैसे कीमती वस्तुएं भी दी हैं।
पर्यावरण और यमुना नदी के संरक्षण के लिए काम करने वाले एक संगठन के सहयोग से देश के अलग-अलग हिस्सों से इन चीजों को जुटाया जा रहा है। अनाथ बच्चों के भविष्य को संवारने में मदद के लिए समाज का हर तबका सामने आ रहे है। इनमें एम्स के डॉक्टर, छात्र, व्यापारी, चित्रकार, चार्टर्ड एकाउंटेंट, सुरक्षाकर्मी से लेकर चालक तक शामिल हैं।

नीलामी से जुटाएंगे धनराशि
भारतीयम संगठन के सचिव अनिल गुप्ता ने बताया कि अनाथ बच्चों की मदद के लिए यह पहल है। अब तक 100 से ज्यादा अलग-अलग प्रकार की वस्तुएं एकत्रित की जा चुकी हैं। इनमें बेशकीमती चीजों से लेकर पेन, सोफा, संगीत वाद्ययंत्र, कपड़े, दीवार और हाथ घड़ी, कैमरा के अलावा कई दूसरी चीजें शामिल हैं। लोग अपनी इच्छा से आगे आ रहे हैं, यह सिलसिला अभी जारी है।
लोगों के सहयोग के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। जल्द ही लोगों को एक वेब लिंक भी उपलब्ध कराएंगे। 27 जून के आसपास दान में मिले सभी उत्पादों की नीलामी की जाएगी और नीलामी से एकत्रित धनराशि से अनाथ हो चुके बच्चों की मदद की जाएगी। इसके लिए बाल संगठनों को लेकर काम करने वाले सरकारी और गैर सरकारी संगठनों का सहयोग लेंगे।

कॉलेज छात्रा ने दी डायमंड रिंग
अनिल गुप्ता ने बताया कि मुंबई की अक्षिता नाम की एक कॉलेज छात्रा ने डायमंड रिंग दी है। वहीं निजी कंपनी में कार्यरत सुरक्षाकर्मी ने कपड़े, चालक ने संगीत वाद्ययंत्र, डॉक्टर ने कपड़े और घड़ियां दी हैं। दान में लोगों से मधुबनी पेंटिंग भी मिली है। मुंबई, पुणे, हैदराबाद सहित दिल्ली-एनसीआर से लोग अनाथ बच्चों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं।

21 साल पुराना कल्प वृक्ष दान किया
अनिल गुप्ता ने बताया कि दिल्ली के चिंतरजन पार्क में रहने वाले वित्त मंत्रालय से सेवानिवृत कर्मचारी एसडी रॉय ने 21 साल पुराना कल्पवृक्ष दान में दिया है। यह वृक्ष उन्होंने अपने घर की छत पर लगा रखा था। कल्पवृक्ष एक विशेष प्रकार का वृक्ष होता है।

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