लोनर हाथी बने जनसुरक्षा के लिए बड़ा खतरा, इंसानों को देखते ही करते हैं हमला

by bharatheadline

बिलासपुर। उत्तर छत्तीसगढ़ में लोनर हाथी जन सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन कर सामने आ रहे हैं। सूरजपुर, धरमजयगढ़ और कटघोरा वन मंडल में लोनर हाथी लगातार इंसानों की जान ले रहे हैं। इनकी निगरानी भी आसान नहीं है दल से अलग होने के कारण वे तेजी से विचरण करते हैं। हर एक घंटे में इनका लोकेशन बदलता रहता है। इनकी मौजूदगी वाले क्षेत्रों की सही जानकारी नहीं होने के कारण जनहानि की घटनाएं बढ़ती हैं।

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दल से अलग होने के कारण यह ज्यादा आक्रामक होते हैं। खुद को सुरक्षित रखने की मंशा से लोनर हाथी तेजी से एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में पहुंचते हैं। जिस क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी नहीं रहती वहां भी अचानक लोडर हाथी के पहुंचने और इंसानों पर हमला करने की शुरुआत ज्यादा खतरनाक हो चुकी है। हाथी प्रबंधन में लोनर हाथियों की बढ़ती संख्या चिंता का कारण बनती जा रही है। विभागीय तौर पर लोनर हाथियों की निगरानी के लिए अलग से कोई प्रयास शुरू नहीं किया गया है, लेकिन सूरजपुर, धरमजयगढ़ और कटघोरा वन मंडल में पिछले एक हफ्ते के भीतर जनहानि की जो भी घटनाएं हुई उन्हें लोनर हाथियों ने ही अंजाम दिया। सूरजपुर वन मंडल के दूरती गांव में सुबह- सुबह मवेशी चराने गए ग्रामीण पर लोनर हाथी ने हमला कर दिया था। उसके पहले तक उस इलाके में हाथियों की मौजूदगी का कुछ पता ही नहीं था क्योंकि यह अकेला हाथी था, इसलिए किसी को पता ही नहीं चला और ग्रामीण को कुचल मार डालने के बाद वह भाग निकला था।
उत्तरी छत्तीसगढ़ में एक सौ से अधिक हाथियों की मौजूदगी है। हाथियों का अपना विचरण क्षेत्र है।हाथियों के बच्चों का जन्म भी हो रहा है।बच्चे अब बड़े हो रहे है। मादा हाथी की दल में स्वीकार्यता तो हमेशा से रहती है, लेकिन हाथियों के व्यवहार के अध्ययन में यह पाया गया है कि नर हाथी, जब आठ से दस साल का हो जाता है तो उसे खुद की सुरक्षा और चारा- पानी के इंतजाम में पारंगत करने दल से भगाया जाता है। यही नर हाथी लोनर के नाम से जाने जाते है।जब दल से इन्हें अलग किया जाता है तो अकेले रहने के दौरान यह ज्यादा खतरनाक और विचलित रहता है। जब तक वह अकेले घूमने वाले किसी वयस्क के संपर्क में नहीं आ जाता तब तक उसका व्यवहार उग्र रहता है। यही स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है। उत्तरी छत्तीसगढ़ में लोनर हाथी की संख्या बढ़ी है वर्तमान में सूरजपुर वन मंडल में ऐसे पांच- छह लोनर हाथियों की पहचान की गई है जो अकेले विचरण कर रहे हैं इनकी मौजूदगी का सही पता भी नहीं चल पाता जिससे जनहानि की संभावना ज्यादा बनी रहती है। यही वजह है कि सूरजपुर वन मंडल में शाम ढलने के बाद जंगली रास्तों से आवाजाही न करने लोगों को समझाइश दी जा रही है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों के साथ स्थानीय अधिकारी-कर्मचारी भी लोनर हाथियों के व्यवहार पर अध्ययन करते रहे है। पिछले वर्षों तक लोनर हाथियों की संख्या कम थी, लेकिन अभी दस से 15 वर्ष वाले हाथियों में से नर को अकेले कर दिया गया है। कुछ दिनों तक तो ये दल के आधा- एक किलोमीटर के दायरे में ही रहते है। बाद में अकेले विचरण करने लगते है।
हाथियों के व्यवहार और उनके प्रबंधन को लेकर काम करने वाले अमलेंदु मिश्र बताते हैं कि लोनर हाथी की निगरानी सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण होती है। अकेला होने के कारण पता ही नहीं चलता कि हाथी कब और किधर चला गया। यही सबसे खतरनाक स्थिति होती है। दल में विचरण करने वाले हाथियों के लोकेशन का पता आसानी से चल जाता है, लेकिन लोनर हाथी के संबंध में सही जानकारी नहीं मिलने के कारण जन हानि की संभावना ज्यादा बनी रहती है।

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