सरकारी जमीन पर नहीं लगा सकते मोबाइल टावर, फिर भी निगम ने पार्क-बगीचों में लगाने का दिया प्रस्ताव

by bharatheadline

रायपुर। राजधानी की घनी आबादी में कई मोबाइल कंपनियों के टावर स्थापित हैं। इससे रहवासियों को टावर की रेडिएशन विकिरण के कारण कई गंभीर बीमारियों का खतरा है। डाक्टरों के मुताबिक मोबाइल टावर के रेडिएशन के कारण हर वर्ग को कैंसर जैसी घातक बीमारी समेत अन्य गंभीर रोग होने का खतरा हमेशा रहता है। इधर, शहरी सरकार और प्रशासनिक अधिकारी शहर के पार्कों और गार्डनों में मोबाइल टावर लगाने के लिए प्रस्ताव बना रहे हैं, जबकि शासकीय जमीन पर मोबाइल टावर नहीं लगा सकते हैं।
नगर निगम के एक बड़े अफसर फिलहाल अभी गार्डनों में मोबाइल कंपनियों के टावर लगाने के लिए कागजों में प्रस्ताव बनाया है। दूसरी ओर राजधानी में अभी इस वक्त 550 मोबाइल टावर हैं, जो सभी वार्डों में अलग-अलग कंपनियों के टावर हैं। वहीं अधिकारियों के मुताबिक ये सभी मोबाइल टावर अभी कहीं भी शासकीय भूमि नहीं लगाए हैं। जो लगे हैं, वे सभी निजी घरों और व्यावसायिक परिसरों में लगे हैं। इस संबंध में निगम आयुक्त सौरभ कुमार से फोन से चर्चा करने संपर्क किया, लेकिन उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया।
आमदनी बढ़ने और गार्डन की सुरक्षा की देखभाल के लिए बना लिया प्रस्ताव
निगम के अधिकारियों के अनुसार शहर भर में 176 गार्डन हैं। उनकी देखरेख के लिए सिर्फ 85 कर्मचारी हैं। इन सबको को देखते हुए निगम के अधिकारियों ने अब शासकीय जमीन पर मोबाइल टावर लगाने के लिए प्रस्ताव लाया है। तर्क है कि मोबाइल टावर होने के कारण कंपनियों से राजस्व की प्राप्ति होगी और कंपनियों के लोग रहने से गार्डन की सुरक्षा भी जाएगी। फिलहाल भाजपा पार्षदों ने रेडिएशन के खतरे को देखते हुए इसके विरोध में उतर गए हैं।
रेडिएशन से कैंसर का खतरा : डा. पंकज
श्री नारायणा अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डा. पंकज ओमर ने बताया कि भारत में अन्य देशों के मुकाबले मोबाइल कंपनियां अपने रेडिएशन को ज्यादा बढ़कर रखती हैं। इस कारण है कि कंपनियों को ज्यादा टावर लगाने न पड़े। रेडिएशन ज्यादा होने के कारण कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। इसके अलावा याददाश्त कमजोर होना, मांसपेशियों में खिंचाव आना, हृदय रोग, सिरदर्द, भूख समय पर नहीं लगाना, बच्चों के मास्तिष्क पर बुरा प्रभाव डालता है। उन्होंने बताया कि लोगों को मोबाइल टावर से 300 मीटर से अधिक दूरी पर रहना चाहिए। इसके अलावा एक जगह दो से अधिक मोबाइल टावर होने के कारण वहां गंभीर रोगों के लिए खतरा बढ़ जाता है।
शासकीय जमीन पर नहीं लगा सकते मोबाइल टावर
मोबाइल टावर लगाने के लिए शासन द्वारा कई मापदंड तय किए गए हैं। उसके अनुसार टावर घनी आबादी में नहीं होना चाहिए। शासकीय जमीन पर नहीं लगा सकते हैं। टेक्निकल जांच के बाद यूडीए, प्रदूषण बोर्ड से एनओसी लेना चाहिए। बिजली लाइनों के पास टावर न हो। साथ ही हाइटेंशन लाइन से दूरी पर हो, जहां गिरने पर न छुएं।
शहर में बिजली लाइनों के बीच कई जगह टावर
शहर में कई घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बड़े-बड़े मोबाइल टावर खड़े किए हैं, जो बिजली लाइनों के नजदीक हैं। ये गिरने से बिजली को छू सकते हैं, जिससे कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है। फिर भी इन मोबाइल टावर कंपनियों के खिलाफ निगम कार्रवाई नहीं करता है। इस मामले में नगर निगम के नगर निवेशक बीआर अग्रवाल ने कहा कि राजधानी में अलग-अलग कंपनियों के कुल 550 मोबाइल टावर हैं। ये सभी निजी मकान और व्यावसायिक परिसरों में हैं। शहर में एक भी टावर शासकीय जमीन पर नहीं लगाया गया है। वहीं, महापौर एजाज ढेबर ने कहा कि गार्डनों में मोबाइल टावर की जगह देने के लिए हमारे पास प्रस्ताव नहीं आया है। प्रस्ताव आएगा तो एमआइसी की बैठक में निर्णय लिया जाएगा।

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