हाथी प्रभावितों की परेशानी देख विधायक हुए भावुक, कहा- स्थाई निदान जरूरी

by bharatheadline

अंबिकापुर। लखनपुर विकासखंड के हाथी प्रभावित परिवारों की परेशानी देख विधायक डा. प्रीतम राम भावुक हो गए। उन्होंने आए दिन उत्पन्न हो रही परेशानी को देखते हुए स्थाई निदान की आवश्यकता जताई। विधायक ने प्रभावित परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य की जांच की और उन्हें दवाइयों का भी वितरण किया। काफी देर तक विधायक प्रभावित परिवारों के बीच रहे। उन्हें आश्वस्त किया कि शासन स्तर से उन्हें राहत देने की भरपूर कोशिश की जाएगी। भविष्य में ऐसी समस्या उत्पन्न न हो इसे देखते हुए विधायक ने सुझाव दिया कि जंगल से लगे क्षेत्र में घर बनाकर खेती-बाड़ी करने से अच्छा है कि वे बस्ती के नजदीक किसी सुरक्षित स्थान पर अपना स्थाई ठिकाना बना लें ताकि भविष्य में ऐसी दिक्कत सामने ना आए।
मैनपाट और लखनपुर क्षेत्र के सीमावर्ती जंगल में जमे हाथियों के दल द्वारा ग्राम पंचायत लबजी के आश्रित ग्राम लोटाढोढ़ी और खजूरढोडी में लगभग 15 ग्रामीणों का घर क्षतिग्रस्त कर दिया है। ये सभी घर जंगल से नजदीक पहाड़ी पर स्थित है।यहां गांव वालों का न सिर्फ घर था बल्कि वे खेती भी किया करते थे। हाथियों द्वारा घरों को क्षतिग्रस्त कर देने के बाद सभी पहाड़ी से नीचे जामा बस्ती में निवास कर रहे हैं। यहां आंगनबाड़ी भवन में कई प्रभावित परिवार के सदस्यों को आसरा दिया गया है। परिचितों के यहां भी प्रभावित परिवार के सदस्यों ने शरण ली है। हाथियों द्वारा बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाए जाने की खबर मिलते ही क्षेत्रीय विधायक डा. प्रीतम राम उनके बीच पहुंचे थे। प्रभावित परिवार के सदस्यों ने हाथियों द्वारा पहुंचाए गए नुकसान का अवलोकन कराया।
विधायक के समक्ष अपनी समस्या रखी। विधायक ने बताया कि लगभग 15 परिवार प्रभावित हैं। इसमें पहाड़ी कोरवा, उरांव और यादव समाज के लोग हैं। प्रभावित परिवारों में 10 छोटे-छोटे बच्चे भी हैं। विधायक ने सभी लोगों की स्वास्थ्य जांच की। कुछ बच्चों के शरीर में घाव नजर आए जिनका उपचार किया। उन्हें दवाइयां भी दी। विधायक ने कहा कि बीच बस्ती में हाथी आक्रमण नहीं करते हैं जो भी घर टूटे हैं वे जंगल से लगे पहाड़ी क्षेत्र में थे। यह हाथियों के विचरण वाला इलाका है इसलिए गांव वालों को समझाइश दी गई कि यदि अब भी वे उसी स्थान का मोह करेंगे तो भविष्य में भी नुकसान संभावित है। मुआवजा की रकम से घरों का मरम्मत कराए जाने के बावजूद कोई गारंटी नहीं है कि हाथी उसे सुरक्षित रहने देंगे, इसलिए पहाड़ी के ऊपर और जंगल के नजदीक घर बनाकर रहने से अच्छा है कि वे बस्ती के आसपास अपना घर बना ले ताकि भविष्य में ऐसी दिक्कत ना हो।विधायक ने सुझाव दिया कि हाथी विचरण क्षेत्र में सिर्फ खेती की व्यवस्था करें। आवास के लिए ऐसा स्थान सुनिश्चित करें जहां हाथियों की आवाजाही नहीं होती और लोग आराम से जीवन यापन कर रहे हैं विस्थापित लोगों की तरह गुजर बसर कर रहे प्रभावित परिवारों की दिनचर्या और आजीविका को लेकर भी विधायक ने लंबी चर्चा की। वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी प्रभावित परिवारों को सुरक्षित तरीके से रखने की व्यवस्था की जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना के अलावा मुआवजा में मिलने वाली रकम से सभी प्रभावित परिवारों के लिए बेहतर आवास की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता भी उन्होंने जताई। प्रभावित परिवार के लोगों ने बीच बस्ती में परिचितों और रिश्तेदारों के यहां भी शरण ली है। अभी भी शाम होते ही हाथियों की आवाजाही पहाड़ी के ऊपर लोटाढोडी और खजूरढोडी बस्ती में हो रही है। उस क्षेत्र में नहीं जाने की सलाह दी गई। हाथियों को असुरक्षित तरीके से खदेड़ने की कोशिश न करने की भी समझाइश विधायक ने दी। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में शासन प्रशासन प्रभावित परिवारों के साथ है। उन्हें हर संभव मदद की जाएगी।


किया आग्रह-हाथी खदेड़ने के बाद लौटे वापस
हाथी प्रभावित क्षेत्र से दोपहर बाद जब विधायक डा. प्रीतम राम वापस लौटने लगे तब कुछ लोगों ने कहा कि वे अभी वापस न लौटे तो अच्छा है। शाम ढलने के बाद हाथियों के विचरण की वजह से होने वाली परेशानियों का प्रत्यक्ष जायजा लेने का आग्रह भी विधायक से किया। विधायक ने उन्हें कहा कि हाथी विचरण क्षेत्र की परेशानियों से वे वाकिफ हैं। भविष्य में ऐसी दिक्कत न आए इसलिए जरूरी है कि जंगल पहाड़ के ऊपर रहने से हमें बचना होगा। उन्होंने प्रभावित परिवार के सदस्यों को प्रेरित किया कि किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर वे सीधे उनसे संपर्क कर सकते हैं।

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