जिले में बढ़े दुष्कर्म के मामले, पिछले साल 72 तो इस साल 123 महिलाएं हुईं शिकार

by bharatheadline

बिलासपुर। दिल्ली दुष्कर्म के बाद महिलाओं पर अत्याचार रोकने कड़े कानून तो बनाए गए, लेकिन इसके बाद भी महिलाओं पर और अत्याचार अधिक हो रहे हैं। जांजगीर-चाम्पा जिले में हर रोज महिलाओं पर दुष्कर्म और अपहरण सहित अन्य अपराध हो रहे हैं। इस वर्ष जनवरी से दिसंबर तक जिले में हर तीसरे दिन एक महिला नाबालिग या युवती दुष्कर्म की शिकार हुई है। महज 11 माह में जिले के 18 थाना क्षेत्रों में दुष्कर्म के 123 मामले दर्ज किए गए हैं।
महिलाओं पर अत्याचार का आंकड़ा कम करने कड़े कानून बनाए गए। नए कानून में यहां तक नियम बनाया गया कि यदि किसी महिला को तिरछी नजर से कोई देखे, तो वह भी वह गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा। नया कानून बनने के बाद कुछ दिन महिलाओं पर अत्याचार कम हुए। इसके बाद फिर वही पुराना ढर्रा शुरू हो गया है, जिसमें गांव गांव और शहर-शहर में रोज महिलाओं के प्रति अत्याचार की शिकायतें आ रही हैं।
जिले के 18 थानों में आए दिन अपराध दर्ज हो रहे हैं। अपराधी तत्व के लोगों को नए कानून से भी डर नहीं रह गया है। पुलिस विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से अब तक दुष्कर्म के 123 मामले दर्ज कर दिए गए हैं। यानि हर तीसरे दिन एक महिला, युवती या नाबालिग दुष्कर्म की शिकार हुई है। पिछले साल दुष्कर्म के 77 मामले इस अवधि में दर्ज हुए थे, लेकिन इस साल यह आंकड़ा बढ़ गया है। इस साल 133 से अधिक महिलाओं के शील भंग की शिकायत पुलिस थाने में पहुंची है। इसके अलावा 12 महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया गया है।
थानों में महिला अधिकारियों की कमी
महिला संबंधित अपराधों की एफआईआर या जांच के लिए सभी थानों में महिला विवेचक नहीं है। थानों में महिला आरक्षक तो हैं, उनसे महिला अपराधियों को गिरफ्तार करने का काम लिया जाता है। लेकिन महिला विवेचक नहीं होने के चलते महिलाओं से संबंधित मामलों की समय पर जांच नहीं हो पाती है और मामले लंबित होते चले जाते हैं।
थानों से महिला डेस्क नहीं
दिल्ली गैंगरेप के बाद महिला संबंधी अपराधों की त्वरित जांच के लिए शासन के निर्देश पर जिले के सभी थानों में महिला डेस्क की स्थापना की गई थी। मगर वर्तमान में थानों से महिला डेस्क का केवल बोर्ड ही नजर आता है। जिले के 18 थानों में से केवल तीन थानों में ही महिला प्रधान आरक्षक हैं।
इस मामले में एएसपी जाजंजीर मधुलिका सिंह ने बताया कि जिले के तीन-चार थानों में महिला एसआई हैं, जबकि महिला आरक्षक सभी थानों में हैं। आवश्यकता पड़ने पर दूसरे थानों से महिला विवेचकों को बुलाया जाता है। अनाचार व छेड़छाड़ के मामले में त्वरित कार्रवाई की जाती है। इस तरह के अपराध होने पर लोग निकटस्थ थाने में संपर्क करें। ऐसे मामलों को छुपाएं नहीं।

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