कृषि कानून का विरोध ठीक नहीं, यह किसानों के हित में

by bharatheadline

रायपुर। कृषि कानून से किसानों को पैदावार बढ़ाने की नवीन विधा, वैज्ञानिक तरीके और खाद, बीज, यंत्र खरीदने में अपेक्षित सहयोग मिलेगा। ऐसे में किसान अपने हित को देखें तो तो विरोध किस बात का? प्रगतिशील किसानों की मानें तो नए कृषि कानून में ही किसानों का हित है। इस कानून से किसानों को आजादी मिलेगी और वे बिचौलियों से मुक्त होंगे। जब तक अन्य राज्यों में पैदावार को ले जाकर बेचने की सुविधा नहीं होगी, तब तक किसानों को बेहतर दाम नहीं मिल पाएगा। उपज की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अच्छे बीज और दवाओं का खेती में प्रयोग होगा। कृषि कानून पर नईदुनिया से चर्चा के दौरान इन प्रगतिशील किसानों ने कहा कि कृषि कानून किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने वाले हैं, इसलिए कृषि कानून का विरोध करना किसानों की तरक्की में अवरोध होगा।

उत्पादन बेचने का मिला अधिकार : टेकूराम साहू
ग्राम निसदा के टेकूराम साहू ने कहा कि कृषि कानून से किसानों को एक नई पहचान मिलेगी। इसके साथ ही दूसरे राज्यों में उत्पादन को बेचने के अवसर तैयार हो रहे हैं। सरकार जब सभी सुविधा दे रही है तो नाराजगी किस बात की? उन्होंने कहा कि सम्मान निधि से सहयोग, सब्सिडी और उत्पाद बेचने का अधिकार के बाद भी विरोध करने का कोई मतलब नहीं। निजी स्वार्थ में बेहतर कानून का विरोध समझ से परे है।

किसानों को मिलेगी अच्छी कीमत : प्रेमलाल साहू
ग्राम टोकरों के युवा किसान प्रेमलाल साहू ने कहा केंद्रीय कृषि कानून को लेकर देश भर में चल रहे हो-हल्ले के बीच सिर्फ किसान राजनीतिक के शिकार हो रहे हैं। कृषि कानून को भविष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इससे उपज की अच्छी कीमत मिलेगी, किसानों को बिचौलियों से राहत मिलेगी। प्रदेश में उन्न्त फसलों की खेती कर रहे किसानों को कृषि कानून से फायदा होगा। छत्तीसगढ़ में सेब, काफी, स्ट्राबेरी की पैदावार होगी। उसकी अच्छी कीमत स्थानीय बाजार में नहीं मिलेगी, बल्कि राष्ट्रीय बाजार की जरूरत होगी।

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