उत्तर छत्तीसगढ़ में शीत लहर के साथ कड़ाके की ठंड, कार के ऊपर जमी बर्फ

by bharatheadline

बिलासपुर। उत्तरी छत्तीसगढ़ में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता समाप्त होते ही एक बार फिर से सरगुजा संभाग का इलाका शीतलहर की चपेट में आ गया है। छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में शनिवार सुबह जबरदस्त पाला पड़ा है। यहां मैदान, खेत-खलिहान पुआल के ढेरों में पाला बर्फ की सफेद चादर के समान बिछ गया था। लोग जब सुबह अपने घरों के बाहर निकले तो पाला के कारण सब कुछ सफेद नजर आ रहा था। यहां का तापमान पांच डिग्री से नीचे पहुंच गया है।
बलरामपुर जिले के कुसमी और सामरी पाट में भी शनिवार को जबरदस्त पाला पड़ा है। कुसमी ब्लाक मुख्यालय में घरों के सामने खड़ी कार के ऊपर बर्फ की मोटी चादर बिछी हुई थी जो पाला जमने के कारण ऐसा हुआ था। सुबह जब लोग घरों से बाहर निकले तो उनकी गाड़ियों की छत और शीशे में सफेद बर्फ की चादर बिछी हुई थी। कुसमी से लगे सामरी पाट में तापमान तीन डिग्री तक पहुंच गया है। वहां भी जबरदस्त पाला पड़ा है। इलाके में शीत लहर चलने से ठंड बढ़ गई है। इधर संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में भी 24 घंटे में न्यूनतम तापमान में करीब दो डिग्री की गिरावट होने के साथ तापमान 7.8 डिग्री पर पहुंच गया है। सुबह से कंपकपा देने वाली ठंडी हवा चलने से लोग बेहाल हैं। पिछले दिनों हुई बारिश और फिर शीत लहर चलने से उत्तरी छत्तीसगढ़ में तापमान काफी नीचे पहुंच गया था। अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान छह डिग्री तक पहुंचा था, लेकिन इसके बाद हिमालय और जम्मू कश्मीर के इलाके में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ ने शीतलहर के प्रवाह को बाधित कर दिया था। इसके चलते तापमान करीब 10 डिग्री तक पहुंच गया था। लोगों को कड़ाके की ठंड से कुछ राहत मिली थी, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता समाप्त होने के बाद एक बार फिर से तेज ठंड पड़ने लगी है। मौसम वैज्ञानिक एएम भट्ट ने बताया कि शीतलहर के चलने से न्यूनतम तापमान में और गिरावट की संभावना है। इधर सरगुजा के पठारी क्षेत्र मैनपाट में शनिवार को जबरदस्त पाला गिरने से पूरा इलाका सफेद चादर से ढंका नजर आ रहा था। मैदान, खेत-खलिहान, पुआल के ढेर में पाला जमा हुआ था। मैनपाट में इस सीजन का पहला पाला पड़ा है। यहां तापमान तीन से चार डिग्री के बीच पहुंच गया है। इलाके में शीत लहर चलने से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। पाला गिरने के बाद कंपकपा देने वाली ठंड से लोग बेहाल हैं। ठंड से बचने स्थानीय लोग अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं।

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