कार्बन स्टाक से पता करेंगे छत्तीसगढ़ के जंगल की जैव विविधता

by bharatheadline

बिलासपुर। कार्बन स्टाक की क्षमता से पता चलता है कि जंगल कितना घना और जैव विविधता वाला है। इसके लिए बीते दो दिनों से प्रदेश के जंगलों में कार्बन स्टाक की क्षमता का मापन किया जा रहा है। देहरादून भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के सदस्यों की ओर से इसके मापन की विधि बताने और प्रशिक्षण देने के लिए प्रदेश के चार वनमंडलों का चयन किया गया है।
प्रशिक्षण की शुरुआत मरवाही वनमंडल से कर दी गई है, जहां संयुक्त वन प्रबंधन समिति के सदस्यों व वन कर्मचारियों को बताया गया कि जंगल के अंदर कार्बन का कितना स्टाक है इसे कैसे मापना है। परिषद के सदस्यों ने संयुक्त वन प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों के अलावा जंगल के आसपास रहने वाले ग्रामीणों खासकर महिलाओं के बीच जंगल की महत्ता पर चर्चा की।
सदस्यों ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण जंगल में भी तेजी के साथ बदलाव आ रहा है। इसमें कार्बन डाइआक्साइड की भूमिका सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। जंगल के भीतर पेड़ के अलावा पत्तियांे व घास में कार्बन की मात्रा कितनी है इसकी पहचान के लिए प्रशिक्षण भी दिया। सदस्यों ने बताया कि जंगलों में कार्बन स्टाक के पांच प्रमुख कारक होते हैं। पेड़ के अलावा मिट्टी, सूखे पत्ते, घास व झाड़ियां और मिट्टी के भीतर पेड़ों की गहराई तक जमी जड़ें।
इसके लिए जंगल के भीतर दशमलव एक हेक्टेयर के क्षेत्र को रस्सी के सहारे गोल घेरा बना दिया जाता है। इस घेरे के भीतर कार्बन स्टाक की मात्रा की पड़ताल करते हैं। घेरे के भीतर पेड़, घास, झाड़ियां, मिट्टी और जड़ों में कार्बन अवशोषण क्षमता की जांच करते हैं। जितना अधिक कार्बन स्टाक होगा उस जंगल में जैव विविधता भी उसी अनुपात में अच्छी मिलेगी। कार्बन स्टाक से तय होता है कि जंगल अपने आप में कितना हरा भरा है।
ग्रामीण महिलाओं पर फोकस
भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के सदस्य डा. मोहम्मद शाहिद बताते हैं कि इस अभियान के पीछे जंगलों को बचाना और अधिक से अधिक पेड़ लगाना है। जंगल के आसपास रहने वाले ग्रामीण महिलाओं को विशेषतौर पर प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि सूखी लकड़ियांे का उपयोग करंें। हरे-भरे पेड़ों को न तो काटें और न ही कटने दें। जंगल जितना घना रहेगा वातावरण उतना स्वच्छ रहेगा। पेड़-पौधे जितना कार्बन डाइआक्साइड का अवशोषण करेगा आसपास का वायुमंडल उतना ही स्वच्छ और साफ रहेगा।

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