11 लाख के फर्जी भुगतान मामले में 10 माह बाद भी एफआईआर नहीं, यह है मामला

by bharatheadline

बिलासपुर। पुलिस अपने दायित्व के प्रति किस तरह संजीदा है, इसकी बानगी जांजगीर-चांपा जिले के नगर पंचायत चंद्रपुर के धारा 420 प्रकरण में देखी जा सकती है। नपं चंद्रपुर के खुद तत्कालीन सीएमओ ने 11 लाख रुपए की फर्जी भुगतान संबंधी प्रकरण एफआईआर के लिए थाने में प्रस्तुत किया था, लेकिन दस माह बाद भी पुलिस मामले में एफआईआर तक दर्ज नहीं कर सकी है। लापरवाही की हद तब पार हो गई, जब न्यायालय के आदेश के बावजूद पुलिस ने इस प्रकरण में प्रतिवेदन ही प्रस्तुत नहीं किया।
चंद्रपुर नगर पंचायत में पिछले साल पार्षद निधि के तहत करीब 11 लाख रुपये की लागत से कागज में टेबल, कुर्सी, ड्यूल डेस्क, आलमारी आदि की खरीदी जैम पोर्टल के माध्यम से जांजगीर के एक फर्म से खरीदी गई। इसका बिल भुगतान के लिए नगर पंचायत चंद्रपुर के सहायक ग्रेड तीन भानू शुक्ला ने सीएमओ के समक्ष प्रस्तुत किया, लेकिन सीएमओ ने नस्ती का परीक्षण व स्टोर कीपर से सत्यापन उपरांत पुटअप करने के निर्देश दिए।
सामग्री खरीदी से पूर्व पीआईसी की सहमति एवं निविदा समिति की स्वीकृति अनिवार्य है, लेकिन 11 लाख रुपये की इस खरीदी के लिए किसी तरह के नियम का पालन नहीं किया गया। इधर, लेकिन काफी समय तक लिपिक भानू शुक्ला ने नस्ती प्रस्तुत नहीं किया। ऐसे में सीएमओ ने मामले को संयुक्त संचालक बिलासपुर के संज्ञान में लाया। तब संयुक्त संचालक ने मामले में जांच के लिए कार्यपालन अभियंता अली बख्श की टीम बनाई।
अली बख्श की टीम ने नगर पंचायत पहुंचकर पूरे मामले में जांच की। जांच के बाद उन्होंने पूरी प्रक्रिया में लापरवाही और बिना सामग्री खरीदी के भुगतान के लिए अनुशंसा सहित नस्ती प्रस्तुत होना प्रमाणित हुआ। जांच प्रतिवेदन के आधार पर संयुक्त संचालक बिलासपुर ने संचालक रायपुर को गड़बड़ी संबंधित प्रतिवेदन 3 अक्टूबर 2019 को भेजा। इधर, पीआईसी के निर्णय पर तत्कालीन सीएमओ ने लिपिक भानू शुक्ला को निलंबित कर दिया। फिर उसके खिलाफ चंद्रपुर थाने में एफआईआर दर्ज करने के लिए 27 सितंबर 2019 को शासकीय पत्र प्रस्तुत किया।
गौरतलब है कि नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया ने विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान 29 दिसंबर 2018 को इस तरह के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे, जिसकी अवहेलना करते हुए पुलिस ने लिपिक भानू शुक्ला के खिलाफ अब तक एफआईआर दर्ज नहीं किया है। कुछ महीनों बाद सीएमओ ने मामले में परिवाद भी प्रस्तुत किया। तब न्यायालय ने भी 4 फरवरी 2020 को चंद्रपुर पुलिस को मामले में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही मामले की सुनवाई 24 फरवरी 2020 को निर्धारित की गई। इसके बावजूद पुलिस ने प्रतिवेदन तो दूर अब तक एफआईआर तक दर्ज नहीं की है। इससे समझा जा सकता है कि चंद्रपुर पुलिस लिपिक को बचाने किस तरह का हथकंडा अपना रहा है।
स्टोर कीपर की रही अहम भूमिका
नगर पंचायत चंद्रपुर में स्टोर कीपर के पद पर चैतराम निषाद कार्यरत है। जिस समय यह गड़बड़ी हुई, उस समय चैतराम ही स्टोर कीपर था। चैतराम ने स्टॉक पंजी में दर्ज होने व निकासी होने के संबंध में कुछ भी अंकित नहीं किया। जब सीएमओ ने चैतराम को कारण बताओ नोटिस जारी किया, तब उसने गोलमोल जवाब देकर दिग्भ्रमिक करते हुए बचने का प्रयास किया, जिसे जांच टीम ने संदेहास्पद व आर्थिक अनियमितता के लिए साजिश रचना बताया।
थाना प्रभारी का बेतुका बयान
चंद्रपुर थाना प्रभारी गणेशराम ध्रुव से जब इस संबंध में बात की गई, तो पहले उन्होंने बयान के लिए तत्कालीन सीएमओ को उपस्थित होने का हवाला दिया, लेकिन जब उपस्थिति के लिए नोटिस जारी किए जाने का सवाल पूछा गया तो वो जवाब ही नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि मामले से संबंधित फाइल कहीं गुम हो गई है, मिल नहीं रही है। जबकि तत्कालीन सीएमओ ने एसपी को पत्र देकर न्यायालय के निर्देश पर चंद्रपुर पुलिस को प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आग्रह किया है। खुद सीएमओ इस मामले में लगातार एसपी कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। सीएमओ ने अब मामले में आईजी को पत्र लिखने का हवाला दिया है।

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