बंगुरसिया पूर्व सर्किल के जंगल में लगी आग, दावानल की घटनाओं के बाद फायर लाईन कटाई, निष्क्रिय बीटगार्डों की वजह से लगातार लग रही जंगलों में आग

by bharatheadline

रायगढ़. गर्मी की शुरूआत होते ही लगातार जंगलों में आग लगने की सूचनाएं आ रही है। पिछले दिनों गजमार पहाड़ी में दो से तीन बार दावानल की घटनाएं हो गई। वहीं मंगलवार को बंगुरसिया पूर्व सर्किल के बरकछार क्षेत्र में आग लगने की घटना सामने आयी। यहां किसी तरह आग को बुझा लेने की बात तो बीटगार्ड के द्वारा की जा रही है, पर लगातार जंगलों में होने वाले दावानल को रोकने के लिए कोई ठोस प्रयास अब तक नहीं किए गए।
इस संबंध में मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार को रायगढ़ वन परिक्षेत्र के बंगुरसिया पूर्व सर्किल के कक्ष क्रमांक 917 में आग लग गई। धीरे-धीरे आग की लपटे बढ़ते गई। बाद में इसे बुझा लेने की बात संबंधित परिसर रक्षक के द्वारा की जा रही है। वहीं परिसर रक्षक का यह भी कहना है कि फायर लाईन बंगुरसिया सर्किल पूर्व में रोड किनारे फायर लाईन कटाई का कार्य किया जा रहा है। जबकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि जनवरी, फरवरी माह में फायर लाईन कटाई का कार्य कर लिया जाता है, ताकि तेज गर्मी पड़ने से पहले लाईन काट दिया जाए। वहीं विभागीय जानकारों का कहना है कि जंगल में दावानाल की घटनाएं निष्क्रिय बीटगार्डों की वजह से हो रही है। जबकि उन्हें इस फायर सीजन में फायर वाचर के साथ साथ दावानल की घटनाओं को रोकने के लिए शासन से अन्य सुविधाएं भी दी जाती है। फायर वाचर का काम होता है कि जंगल में भ्रमण कर आग पर नजर रखे और कहीं भी दावानल होने पर इसे बुझाने के साथ साथ संबंधित कर्मचारियों को इसकी सूचना दे। ताकि जंगल में आग बढ़े नहीं और इसे रोका जा सके, पर यहां ऐसा कुछ भी नहीं देखा जा रहा है। गजमार पहाड़ी में तीन दफे दावानल की घटना, बंगुरसिया के जंगल में आग लगना इस बात की गवाह है कि विभाग के कर्मचारी आग को रोकने के लिए कोई भी ठोस पहल नहीं किए हैं।
समितियों ने बना रखी है दूरी
यहां यह बताना भी लाजिमी होगा कि वन विभाग से लगभग कुछेक समितियों को छोड़ को सभी ने दूरी बना रखी है। जंगल को आग से बचाने के लिए समितियों के खाते में राशि भी डाली जाती है, पर उसका इस्तेमाल आग बुझाने के लिए नहीं देखा जा रहा है। यही नहीं सिर्फ आग के सीजन में ग्रामीणों की पूछपरख को देख वे विभाग से दूर हो गए हैं। अब तक दावानल को रोकने के लिए न जिला स्तर पर और न ही रेंज स्तर पर कोई बैठक हुई।
बंगुरसिया में पहले जल चुका है कूप
विदित हो कि लगभग पांच साल पूर्व बंगुरसिया सर्किल में ही कूप जलने की बड़ी घटना घटित हुई थी। जहां दावानल के कारण शासन को काफी नुकसान हुआ था। यही नहीं उस दौरान उसकी भरपाई करने के लिए अवैध कटाई का भी मामला अखबारों की सुर्खिंयों में रही है। इसके बाद भी दावानल की घटनाओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

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