अपना घर आश्रम की वर्षगांठ में पहुंचे रामचन्द्र
मंदबुद्धि एवं अनाथ की सहायता करता है अपना घर

by bharatheadline


रायगढ़। शहर के सोनिया नगर से आगे ट्रांसपोर्ट नगर रोड पर स्थित सेवा भावी संस्था अपना घर की पहली वर्षगांठ मनायी गई। जिसमें जिला प्रेस एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं संस्कार पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर रामचन्द्र शर्मा व उपाध्यक्ष विनोद बंसल, व्यवस्था प्रभारी बजरंग अग्रवाल, मैनेजर दीपक शर्मा व अन्य उपस्थित रहे।
संस्था के संयोजक एवं देखभाल प्रभारी बजरंग अग्रवाल ने बताया कि स्वामी सदानंद जी महाराज के करकमलो से वर्ष 2020 के 11 मार्च को इस संस्था की स्थापना हुई थी। जिसमें साठ बिस्तर की व्यवस्था रखी गई है। इस संस्था का उद्देश्य अंजान, असहाय, निर्बल, गुमशुदा, मंदबुद्धि लोगों को आश्रम में रखकर उनकी देखभाल करना, सेवा करना है। वर्तमान में इस आश्रम में 33 लोगों को रखा गया है जिसमें सोलह वर्ष की उम्र से लेकर सत्तर वर्ष की उम्र के लोग शामिल है। आज वर्षगांठ के अवसर पर अतिथि के रूप में रामचन्द्र शर्मा ने असहाय व मंदबुद्धि लोगों के साथ समय बिताया और आश्रम की व्यवस्था को मैनेजर दीपक शर्मा के माध्यम से समझा। इस दौरान फल वितरण कर उन्होंने भविष्य में अपना घर आश्रम के लिए क्षमता स्वरूप मदद का आश्वासन भी दिया। फिलहाल रायगढ़ के अपना घर आश्रम में अध्यक्ष राधेश्याम अग्रवाल, उपाध्यक्ष विनोद बंसल, सचिव नवीन कुमार, वित्त सचिव नानक बंसल एवं व्यवस्था प्रभारी बजरंग अग्रवाल अपनी सेवाएं नि:स्वार्थ भाव से दे रहें हंै। अतिथि रामचन्द्र शर्मा ने इसके लिए सभी को इस सेवाभाव के लिए नमन करते हुए धन्यवाद दिया। बजरंग अग्रवाल ने बताया कि वर्षगांठ के अवसर पर सभी आश्रमवासियों के लिए नृत्य एवं संगीत के द्वारा त्यौहार का माहौल बनाकर जलपान कराया गया।
अपना घर का मुख्यालय भरतपुर (राजस्थान) में स्थित
अपना घर के व्यवस्था प्रभारी बजरंग अग्रवाल ने बताया कि यह संस्था वर्ष 2000 से प्रारंभ की गई थी जिसके अंतर्गत पूरे देश भर में 39 अपना घर आश्रम चल रहे हैं। इसमें छत्तीसगढ़ के साथ-साथ राजस्थान, दिल्ली, यूपी, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा व नेपाल आदि मे ये आश्रम मौजूद हैं। इन आश्रमों में ऐसे व्यक्ति को रखा जाता है जिनका कोई नहीं होता। वे अकेले व असहाय होते हैं। इनकी दैनिक दिनचर्या दवा, भोजन-पानी, कपड़े बदलना आदि सबकुछ वहां रहने वाले स्टॉफ के द्वारा ही सेवाभाव से किया जाता है। वृद्धजनों के लिए दादा-नाना घर, युवा जनो के लिए चाचा-भैया घर, गंभीर बीमार लोगों के लिए सघन सेवागृह, सैलून आदि का नाम सेवासंगम भवन आदि तरीके से ये आश्रम चलाए जाते हैं।

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