जेसीबी आई, दीवार ढहाया, भौचक्क देखते रहे लोग, आखिर किसने ढहाया अशर्फी देवी अस्पताल का दीवार व भवन !

by bharatheadline

रायगढ़। जिला प्रशासन और सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट के बीच आपसी खींचतान में फंसा शहर का अशर्फी देवी महिला चिकित्सालय एक बार फिर सुर्खियों में है। अस्पताल परिसर के बुजी भवन चौक की तरफ जनकर्म प्रेस वाली गली से लगकर स्थित जर्जर भवन को अचानक धराशायी कर दिया गया है। इस भवन को किसके आदेश से गिराया गया है इसकी जानकारी नही मिल पा रही है। बताया जा रहा है कि इस अस्पताल परिसर को लेकर ट्रस्ट के पास स्थगन आदेश है। भवन के धराशायी होनें के बाद शहर में एक बार फिर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट द्वारा संचालित अशर्फी देवी महिला चिकित्सालय पिछले कई सालों से किसी न किसी कारणों से सुर्खियां बनती रहा है। इस भवन पर कब्जे को लेकर जिला प्रशासन और ट्रस्ट के बीच चल रहे खींचतान कोई नई बात नही है। जहां तक इस अस्पताल परिसर पर कब्जे की बात है तो पूर्व कलेक्टर मुकेश बंसल के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2013 जून माह में तत्कालीन जिलाधीश के द्वारा ट्रस्ट पर अस्पताल की यथोचित देखरेख न करने को लेकर आरोप लगाते हुए अस्पताल में देखरेख के लिए 8 लोगों की कमेटी बनाई गई थी, जिसमें प्रशासनिक अधिकारी सदस्य बनाए गए थे और इसके संचालन का जिम्मा अस्पताल के इंचार्ज डाक्टर रूपेन्द्र पटेल को सौंपा गया था। तब से लेकर अब तक इस अस्पताल का संचालन कमेटी के माध्यम से होता रहा है। इसी बीच वर्ष 2019 में ट्रस्ट की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने वर्ष 2013 के तत्कालीन कलेक्टर के आदेश को निरस्त कर दिया था। मगर इसके बावजूद अस्पताल का संचालन सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट को नही सौंपा गया और जिला प्रशासन द्वारा बनाई गई कमेटी ही इसकी देखरेख करती रही। जिसको लेकर नवंबर 2020 में ट्रस्ट की ओर से इस अस्पताल पर कब्जे के लिए फिर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई जिस पर माननीय उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश जारी करते हुए राज्य शासन को नोटिस जारी किया है। ऐसी परिस्थितियों के बीच अचानक कल शाम को अस्पताल परिसर के आसपास के लोगों ने शाम के वक्त एक जेसीबी आई और इस जेसीबी के माध्यम से आनन-फानन में अशर्फी देवी महिला चिकित्सालय की पुरानी दीवार को ढहा दिया गया। करीब 3 घंटे तक दीवारों को ध्वस्त करने के बाद एकाएक जेसीबी वहां से गायब हो गई। लोगों ने बताया कि उन्हें नही मालूम की यह जेसीबी किसकी थी और किसके आदेश से इस भवन को ढहाया गया है। बहरहाल इन पंक्तियों के लिखे जाने तक कोई भी कुछ भी कहने को तैयार नही है।
ट्रस्ट के पास स्थगन आदेश-राजेश भारद्वाज
हमारे संवाददाता ने इस पूरे मामले में पड़ताल की तो ट्रस्ट की ओर से राजेश भारद्वाज ने बताया कि ट्रस्ट के पास माननीय उच्च न्यायालय का स्थगन आदेश है। तोड़फोड़ की जानकारी जैसे ही हमे मिली हम इस संबंध में तथ्य एकत्र कर रहे हैं। तदोपरांत जो भी कार्रवाई संभव होगा ट्रस्ट की ओर से की जाएगी।
एसडीएम साहब का फोन मिला बंद
वहीं इस संबंध में जिला प्रशासन का पक्ष जानने के लिए हमने जब रायगढ़ एसडीएम युगल किशोर उर्वसा से चर्चा करनी चाही तो उनका फोन स्वीच ऑफ मिला।

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