देशी शराब बोतलों का नही होता बारकोड स्केन, सुपरवाईजर से मिलकर होती है बड़ी गड़बडी

by bharatheadline

क्षेत्र के आबकारी उप निरीक्षकों को मिली हुई है जिम्मेदारी
एक सुपरवाईजर ने किया है बड़ा खुलासा
रायगढ़
. छत्तीसगढ़ मंे भूपेश बघेल सरकार बनने के बाद शहर से लेकर गांव तक अवैध शराब की बिक्री मंे बड़ा इजाफा हुआ है रमन सरकार के समय ठेकेदार प्रथा बंद होनें के बाद इसका सरकारीकरण किया गया था उस समय कांग्रेस के लोग रमन सरकार पर अवैध शराब बिक्री मामले में घेरने में लगे थे और अब भाजपा इस मामले में लगातार आरोप लगाते आ रही है। इन सब से अलग बिना परमिट की देशी शराब का बड़ा मामला सामने आया है। जिसमें हर सरकारी दुकान में बिकने वाली देशी शराब की हर पेटी के पीछे कमीशन का बड़ा खेल होता है इसमें र्क्वाटर, हाफ व बोतलों के बारकोड को स्केन नही किया जाता, जिनका हिसाब अलग से रखा जाता है। इस गड़बड़ी में संबंधित आबकारी उप निरीक्षक सुपरवाईजर से लेकर क्षेत्र के बड़े अधिकारियों तक कमीशन देते हैं और हर पेटी के पीछे 30 रूपए का कमीशन बांटा जाता है। जिसमंे क्षेत्र के सुपरवाईजर भी शामिल है।
यह जानकारी रायगढ़ के एक सुपरवाईजर ने हमे दी जिसकी पूरी बातचीत का टेप हमारे पास मौजूद है। जिसमें सुपरवाईजर यह बताता है कि आशीष उप्पल नाम का आबकारी उप निरीक्षक उनके कमीशन की राशि 10 रूपए प्रति पेटी के बजाए पांच रूपए देता है। उसके अनुसार एक पेटी के पीछे 30 रूपए जिला स्तर पर बचाया जाता है और पूरा हिसाब अगर देखा जाए तो प्रतिमाह यह कमीशन कई लाख रूपए तक पहुंच जाता है। लेकिन वे इसे लेने के लिए इंकार कर रहे हैं। वह बताता है कि शराब दुकानों में बार कोड लगी हुई शराब के साथ-साथ बड़े पैमाने पर आती है पर अधिकांश पेटियों में रखी देशी शराब का बारकोड स्केन नही किया जाता और उन्हें दुकान में आने वाले ग्राहकों को बेचा जाता है। इस प्रकार देशी शराब की पेटियां आती है और उन पेटियों में मौजूद शराब की बिक्री सरकारी शराब दुकानों से ही होती है और इसमें से होने वाली बिक्री का हिस्सा क्षेत्र के सुपरवाईजर से लेकर रायगढ़ के अधिकारियों से लेकर रायपुर तक जाता है। जिसमें सुपरवाईजर को प्रत्येक पेटी का 10 रूपए मिलता था वह अब पांच रूपए कर दिया गया है। जिसको लेकर कई सुरवाईजर नाराज हैं और वो खुद भी आशीष उप्पल से 10 रूपए की बजाए पांच रूपए लेने से इंकार कर चुका है।
देशी व विदेशी शराब दुकानों में काम करने वाले इस सुपरवाईजर के बड़े खुलासे मंे यह बात भी सामने आती है कि बिना स्केन की गई शराब से हर माह करोड़ो रूपए की आय होती है जिसकी जानकारी पुलिस को नही होती और यही शराब अवैध रूप से कोचियों को बेची जाती है, इतना ही नही शराब तस्करी करवाने के पीछे कई आबकारी उप निरीक्षक बकायदा कमीशन लेकर शराब दुकानों मंे मौजूद सेल्समेन तथा क्षेत्र के सुपरवाईजरों को भी मिला लेते हैं। यहां यह बताना लाजमी होगा कि आबकारी विभाग के इस बड़े खेल का सर्वाधिक फायदा आबकारी विभाग को हो रहा है जबकि चोर से लेकर अन्य अपराधिक मामलों में परेशान होने वाली पुलिस अवैध शराब बिक्री के मामले में भी पूरी मेहनत कर रही है और उन्हें इस पूरे खेल का पता ही नही चल रहा।
बहरहाल देखना यह है कि अवैध शराब की बिक्री के मामले मंे शामिल कथित आशीष उप्पल के अलावा अन्य कौन-कौन आबकारी उप निरीक्षक शामिल है इसका खुलासा होना चाहिए, चूंकि हमने जब एक वरिष्ठ आबकारी अधिकारी रमेश अग्रवाल से बात की तो उन्होंने फोन पर इस बात को स्वीकारा कि पेटियों के पीछे कमीशन का खेल चलता था लेकिन अब वे इस जगह से हटाए जा चुके हैं और पूरा हिसाब आशीष उप्पल रखता है और वही उन्हें केवल इतना मालूम कि बिना बारकोड स्केन किये ही देशी शराब सरकारी शराब दुकानों से बिक रही है। रमेश अग्रवाल से की गई बातचीत का टेप भी हमारे पास मौजूद है।

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