जेपीएल और टीआरएन के राखड बांध से क्षेत्रवासियों को परेशानी, कई उद्योग जंगलों में फेक रहे हैं गर्म राखड़, लगातार फैल रहा है प्रदूषण, विभाग को नही है जानकारी

by bharatheadline

खास खबर Kakajee.com @नरेश शर्मा
रायगढ़. छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला कहने को तो बड़ी उद्योग नगरी के नाम से जाना जाता है और यहां धीरे-धीरे और भी नए उद्योगों के स्थापना के साथ-साथ पुराने उद्योगों के विस्तार की भी प्रक्रिया जारी है, लेकिन नियमों की अनदेखी के चलते प्रदूषण से फैल रही बीमारियां, खत्म होते जंगल तथा उड़ती राख पर विभाग का नियंत्रण नही होनें से निरंतर उद्योग प्रबंधन अपनी मनमानी कर रहा है जिसका खामियाजा जिले के लोग उठा रहे हैं। साथ ही साथ हरे भरे जंगल भी खत्म हो रहे हैं।
रायगढ़ जिले के लैलूंगा विधानसभा स्थित जेपीएल के राखड़ बांध को लेकर एक बार फिर से क्षेत्र के ग्रामीण सड़क पर उतरने के लिए तैयार हैं चंूकि राखड़ बांध के आसपास प्रबंधन द्वारा सही ढंग से पहल नही किए जाने के चलते वहां फेके जाने वाली राखड बांध से निकलकर आसपास के खेतों में फैल रही है इतना ही नही गर्मी के चलते हवा में उड़ती राख से घरों के लोग भी खासे परेशान हैं इतना ही नही करीब 5 से 6 किलोमीटर क्षेत्र में इस राखड का यह प्रभाव देखने को मिलता है जिससे लोग सड़क व घरों को नही देख पाते। यही हाल घरघोड़ा ब्लाक स्थित टीआरएन एनर्जी उद्योग का भी है जिसकी प्रबंधन की लापरवाही से गर्म राख आसपास के जंगलों में बिना रोक टोक के फेंकी जाती है और उसके राखड बांध में भी भारी अव्यवस्था देखी जा रही है। जिले के पर्यावरण प्रेमियों ने इस मामले में पर्यावरण अधिकारी को लिखित शिकायत दर्ज कराई है। जिले के पर्यावरण अधिकारी को शिकायत में यह बताया गया है कि बंजारी रोड़ स्थित जंगलों के अलावा घरघोड़ा, लाखा तथा आसपास के इलाकों में वहां स्थित सिंघल, टीआरएन, डीबी पावर, सराईपाली स्थित जंगलों में वहां लगे उद्योगों द्वारा राखड़ फेंकी जा रही है जबकि इनके पास राखड़ प्रबंधन के लिए कोई व्यवस्था नही की गई है।
जिले में पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले जन चेतना मंच के वरिष्ठ पदाधिकारी राजेश त्रिपाठी बताते हैं कि वर्तमान में रायगढ़ जिले में लगे उद्योगों द्वारा 85 लाख मेट्रिक टन राखड़ निकासी की जाती है और इसमें से कुछ ही उद्योगों के पास राखड़ बांध बनाए गए हैं। जबकि 80 प्रतिशत से अधिक छोटे बड़े उद्योगों के पास उनके उद्योगों से निकलने वाली राखड़ के रख रखाव की व्यवस्था नही होनें से उन्हें लापरवाही पूर्वक आसपास के जंगलों में फेक दिया जाता है जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। राखड के जंगलों में फेंकने के चलते जंगलों का भी सफाया हुआ है और इस मामले में वन विभाग कोई कार्रवाई नही करता।
इस संबंध में हमने जिले के पर्यावरण अधिकारी एसके वर्मा से बात की तो उन्होंने बताया कि रायगढ़ जिले में पतरापाली में स्थित जिंदल स्टील एण्ड पावर लिमिटेड, तमनार के जिंदल पावर लिमिटेड़, घरघोड़ा क्षेत्र के ग्राम भेंगारी में स्थित टीआरएन एनर्जी, खरसिया क्षेत्र के ग्राम बिंजकोट, दर्रामुडा में स्थित एसकेएस पॉवर जनरेशन लिमिटेड़, पुसौर क्षेत्र में स्थित एनटीपीसी लारा सुपर थर्मल पॉवर प्रोजेक्टर एवं ग्राम छोटे भंडार में स्थित रायगढ़ इनर्जी जनरेशन लिमिटेड़ के पास अनुमति है इसके अलावा अन्य स्पंज आयरन उद्योगों के पास राखड़ प्रबंधन के लिए कोई व्यवस्था नही है। उनका कहना है कि जंगलों तथा आसपास के इलाकों में अगर लापरवाही पूर्वक उद्योग से निकलने वाली राख कोई भी उद्योग डंप कर रहा है तो उसकी जांच करके कार्रवाई की जाएगी।

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