शख्ससियत ऐसी की लोग मिसाल दें

by bharatheadline

बचपन से ही जुझारू प्रवृति के मिलनसार श्री राजीव रत्न चौबे जिन्हे न केवल पुरानी बस्ती वरन सारा शहर लल्ला भाई के नाम से जानता है।
आज कोरो ना से जंग लड़ रहे हैं , कभी सर्वहारा वर्ग के लिए तो कभी छाट्रो के लिए, अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले शख्स राजीव रत्न चौबे जी किसी परिचय के मोहताज नहीं। जिन्होंने पंद्रह साल तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्य क्ष रहते हुए सदैव कर्मचारियों के हित में कार्य किया, आज २०० बेडेड हॉस्पिटल में corona जैसी महामारी से लड़ रहे हैं।
गत पांच दिवस से सर्दी खांसी, बुखार जैसे लक्षण दिखने के बाद स्वयं चौबे जी ने कॉविड टेस्ट करवाया और पॉजिटिव रिपोर्ट के बाद स्वयं को हॉस्पिटल प्रबंधन को सौप दिया है।
राजीव रत्न चौबे जी हॉस्पिटल कु प्रबंधन के शिकार होते जा रहे हैं, उच्च अधिकारी जहां शब्द वीर बन कर बड़े बड़े दावे कर रहे हैं , वही जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
श्री चौबे जी का ऑक्सीजन सेचूरेशन धीरे धीरे कम होता जा रहा है, वेंटीलेटर की सख्त आवश्यकता है, को वेंटीलेटर भी नसीब नही हो पा रहा है, वहीं उनका सुपुत्र विनीत चौबे कई जगह में अपने को असहाय पा रहा है।
रायगढ़ का हमेशा से दुर्भाग्य रहा है कि रायगढ़वासियो को जिला कलेक्टर तो ऊर्जा वान , कर्तव्यनिष्ठ मिलते है लेकिन मातहत कर्मचारी इन्हे दिग्भ्रमित कर देते हैं
और अंततः इनके पास वही समाचार पहुंचता है जो इनके निकम्मे कर्मचारी चाहते है।
आम जनता को बारंबार घड़ियाल ऐ जहांगीर क्यू बजाना पड़ता है, इस विषय को कर्मठ जिला कलेक्टर को सोचना चाहिए।
जिला कलेक्टर और सी एम एच ओ केसरी साब के दरवाजे तो खुले हुए हैं आम आदमी के लिए, लेकिन निगम क्षेत्र से दूर एम सी एच एवम मेडिकल कॉलेज अस्पताल सौ / दो सौ बिस्तरों का अस्पताल प्रबंधन , आम रायगढ़ वासियों को चूड़ी पहनाने की फिराक में रहता है, उनके द्वारा बरती जा रही लापरवाही के कारण कभी भी रायगढ़ के पुराने बाशिंदे के कोप भाजन का शिकार बना बैठेंगे, यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी।
ऐसी स्थिति में ये सियार की तासीर रखने वाला मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन, पुनः जिला कलेक्टर एवम ऊर्जा वान पुलिस कप्तान के पीछे जा छुपे गा।
शासन प्रशासन ने नेक नियति दिखाते हुए अधिक से अधिक वैक्सीनेशन सेंटर प्रारंभ करवाए लेकिन दुर्भाग्य ऐसा कि अधिकतर सेंटर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जा रहा और ना ही मास्क / सेनिटायजर की व्यवस्था है । ऐसी जगह में किसी का भी संक्रमित होना लाजिमी है, लल्ला भाई भी कोरो ना वैक्सिन की सेकंड डोज लेते हुए ही संक्रमित हुए।
[20/04, 1:37 pm] Sibi Panday: शख्ससियत ऐसी की लोग मिसाल दें
बचपन से ही जुझारू प्रवृति के मिलनसार श्री राजीव रत्न चौबे जिन्हे न केवल पुरानी बस्ती वरन सारा शहर लल्ला भाई के नाम से जानता है।
आज कोरो ना से जंग लड़ रहे हैं , कभी सर्वहारा वर्ग के लिए तो कभी छाट्रो के लिए, अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले शख्स राजीव रत्न चौबे जी किसी परिचय के मोहताज नहीं। जिन्होंने पंद्रह साल तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्य क्ष रहते हुए सदैव कर्मचारियों के हित में कार्य किया, आज २०० बेडेड हॉस्पिटल में corona जैसी महामारी से लड़ रहे हैं।
गत पांच दिवस से सर्दी खांसी, बुखार जैसे लक्षण दिखने के बाद स्वयं चौबे जी ने कॉविड टेस्ट करवाया और पॉजिटिव रिपोर्ट के बाद स्वयं को हॉस्पिटल प्रबंधन को सौप दिया है।
राजीव रत्न चौबे जी हॉस्पिटल कु प्रबंधन के शिकार होते जा रहे हैं, उच्च अधिकारी जहां शब्द वीर बन कर बड़े बड़े दावे कर रहे हैं , वही जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
श्री चौबे जी का ऑक्सीजन सेचूरेशन धीरे धीरे कम होता जा रहा है, वेंटीलेटर की सख्त आवश्यकता है, को वेंटीलेटर भी नसीब नही हो पा रहा है, वहीं उनका सुपुत्र विनीत चौबे कई जगह में अपने को असहाय पा रहा है।
रायगढ़ का हमेशा से दुर्भाग्य रहा है कि रायगढ़वासियो को जिला कलेक्टर तो ऊर्जा वान , कर्तव्यनिष्ठ मिलते है लेकिन मातहत कर्मचारी इन्हे दिग्भ्रमित कर देते हैं
और अंततः इनके पास वही समाचार पहुंचता है जो इनके निकम्मे कर्मचारी चाहते है।
आम जनता को बारंबार घड़ियाल ऐ जहांगीर क्यू बजाना पड़ता है, इस विषय को कर्मठ जिला कलेक्टर को सोचना चाहिए।
जिला कलेक्टर और सी एम एच ओ केसरी साब के दरवाजे तो खुले हुए हैं आम आदमी के लिए, लेकिन निगम क्षेत्र से दूर एम सी एच एवम मेडिकल कॉलेज अस्पताल सौ / दो सौ बिस्तरों का अस्पताल प्रबंधन , आम रायगढ़ वासियों को चूड़ी पहनाने की फिराक में रहता है, उनके द्वारा बरती जा रही लापरवाही के कारण कभी भी रायगढ़ के पुराने बाशिंदे के कोप भाजन का शिकार बना बैठेंगे, यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी।
ऐसी स्थिति में ये सियार की तासीर रखने वाला मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन, पुनः जिला कलेक्टर एवम ऊर्जा वान पुलिस कप्तान के पीछे जा छुपे गा।
शासन प्रशासन ने नेक नियति दिखाते हुए अधिक से अधिक वैक्सीनेशन सेंटर प्रारंभ करवाए लेकिन दुर्भाग्य ऐसा कि अधिकतर सेंटर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जा रहा और ना ही मास्क / सेनिटायजर की व्यवस्था है । ऐसी जगह में किसी का भी संक्रमित होना लाजिमी है, लल्ला भाई भी कोरो ना वैक्सिन की सेकंड डोज लेते हुए ही संक्रमित हुए।

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