भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से सटे गांव के लोगों ने मांगी अपनी ‘पहचान’, पानी की भी है समस्या

by bharatheadline

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच नादिया जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा से लगने वाले अंतिम गांवों के लोगों ने बहुप्रतिक्षित मांग राजनीतिक दलों के सामने रख दी है। नादिया जिला के नया शिकारपुर, रानीनगर और डोहोकला के लोगों ने चुनावी मौसम में लंबे समय से लंबित शेड्यूल ट्राइब कार्ड की मांग राजनीतिक दलों के सामने रख दी है।
न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए इन गांव के लोगों ने कहा, ‘स्थानीय प्रशासन को कई पत्र भेजे गए, इसका कोई परिणाम नहीं निकला। इसके बजाय, हमें जन्म से अपनी ‘महतो की पहचान’ साबित करने के लिए कहा गया।”
एक ICDC शिक्षक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, “यह हमारे लिए यह साबित करने का एक काम बन गया है कि हम महतो हैं। वास्तव में, हमें यह नहीं पता कि यह कैसे संभव होगा। लोगों की परंपरा, संस्कृति, बोली आकार लेती है। जहां वे अतीत में रहे और वे जहां भी जाते हैं, उसे अपने साथ ले जाते हैं। अगर अधिकारियों को हमारी अपील पर संदेह है तो उन्हें यह अध्ययन करने के लिए कि हम महतो समुदाय से हैं या नहीं, यहां आना होगा और खुद देखना होगा।”
गांव के एक अन्य निवासी सुचित्रा महतो ने कहा, “हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि हमें एसटी कार्ड से वंचित क्यों किया जा रहा है? अधिकारियों ने कहा कि यह तभी हो सकता है जब हम अपने वंश को साबित कर सकें। हजारों लोग झूठ कैसे बोल सकते हैं?”
तीन गांवों में 95 फीसदी परिवार – न्यू शिकारपुर, रानीनगर और डोहोकोला – जहां लोग एसटी कार्ड चाहते हैं, खेती पर निर्भर हैं। यहां पानी एक और मुद्दा है। न्यू शिकारपुर के ग्रामीण चाहते हैं कि राज्य सरकार द्वारा ‘सजोल धर’ को तुरंत लागू किया जाए। हालांकि गांव में कई नलकूप हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश काम नहीं करते हैं।
एक ग्रामीण ने कहा, “हम 10 रुपये में प्रत्येक बैरल पानी खरीदते हैं। हम गरीब हैं और हमारा परिवार बड़ा है। पानी एक समस्या है। हर परिवार सिर्फ एक या दो बैरल के साथ नहीं काम कर सकता। अगर लोगों को एक बार पानी खरीदना पड़े तो ठीक, लेकिन रोज पीने का पानी खरीदना पड़े और वह भी सालों तक, यह दर्द से कम नहीं।”

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