कोरोना का कहर: पत्‍नी-बेटा कॉल करते रह गए, संक्रमित ने तड़प-तड़प कर सड़क पर तोड़ा दम

by bharatheadline

उत्‍तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के पिपराइच विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पिपरा बसंत गोपालपुर के 60 वर्षीय देवेंद्र उपाध्याय दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के निकट फुटपाथ पर पेड़ की छाव में तड़प तड़प कर दम तोड़ गए। उन्हें बचाने के लिए उनकी पत्नी, बेटा और भतीजा लोगों को मदद की गुहार लगाते रहे। मोबाइल और वाट्सअप पर जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए सभी हेल्पलाइन नम्बर पर चीखते रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिकार 4 बजे देवेंद्र उपाध्याय ने अंतिम सांस ली। 

देवेंद्र के भतीजे विक्रांत उपाध्याय एवं पुत्र जुगनू उपाध्याय ने बताया कि उनका सावित्री हास्पिटल में महीनों से उपचार होता था। हर दिन 15 दिन पर उनकी डायालिसिस होती थी। सोमवार को डायलिसिस के लिए ही वे कार से भतीजे विक्रांत उपाध्याय, पुत्र जुगनू और पत्नी सुभद्रा देवी के साथ सावित्री अस्पताल आए थे। डायलिसिस से पहले उनका कोरोना का टेस्ट कराया गया जिसमें वे पॉजिटिव आ गए। सावित्री अस्पताल ने उन्हें भर्ती करने और डायलिसिस करने से इनकार कर दिया। देवेंद्र का आरोप है कि रोने गिड़गिड़ाने के बाद भी कोई असर नहीं हुआ तो वे पैनेसिया आए। लेकिन आक्सीजन की उपलब्धता नहीं होने का हवा देकर उन्हें भेज दिया। इस बीच देवेंद्र उपाध्याय की हालत बिगड़ने लगी तो परिजन विश्वविद्यालय के निकट फुटपाथ पर पेड़ की छांव में उन्हें बिठा एक लाइन से जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए अस्पतालों की सूची को देख कॉल किया लेकिन कोई मदद नहीं मिली। 

मरने के बाद शव वाहन के लिए भी जूझे
जुगनू बताता है कि पिता की मौत के बाद शव वाहन के लिए भी कोविड 19 कंट्रोल रूम समेत सभी हेल्पलाइन नम्बर पर कॉल किए लेकिन कोई मदद नहीं मिली। उधर भतीजा राहुल उपाध्याय, सतीश मौर्या समेत सड़क से गुजरने वाले लोग भी मदद के लिए कॉल कर रहे थे। हालांकि कोई निकट नहीं आता था। बाद एक शव वाहन आता दिखा तो उससे लोगों ने उसे रोका। पीपीई किट शव वाहन चालक ने दिया जिससे शव को परिवार के लोगों ने ही मिल कर पैक किया। उसके बाद पिता के शव को अंतिम संस्कार के लिए राजघाट ले गए जहां अंतिम संस्कार किया।

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