गुर्दे और खून के मरीजों के लिए दोहरी आफत बना कोरोना, इलाज बिना गंवानी पड़ रही जान

by bharatheadline

कोरोना संक्रमण पहले से बीमार चल रहे मरीजों के लिए आफत का सबब बना हुआ है। संक्रमण की जद में गुर्दा और खून के रोगी भी आ रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत डायलिसिस कराने वाले मरीजों को हो रही है। चार दिन पहले जगदीशपुर के पिपरा बसंत निवासी मरीज निजी अस्पताल में डायलिसिस कराने पहुंचे। एंटीजन जांच में मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने डायलिसिस से इनकार कर दिया। अस्पताल से वापस घर लौटते समय उनकी मौत हो गई। पेश है डायलिसिस और खून के मरीजों को लेकर मचे हाहाकार पर प्रशासन के दावों की घंटी बजाती रिपोर्ट।

हर हफ्ते में दो बार होती है डायलिसिस, रिपोर्ट आ गई पॉजिटिव
महानगर के झारखंडी निवासी विनय किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं। उनका डायलिसिस जिला अस्पताल में चलता है। हफ्ते में दो बार वह डायलिसिस कराने के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। शनिवार को तय रूटीन के मुताबिक वह डायलिसिस कराने अस्पताल पहुंचे। वहां पर डायलिसिस से पहले उनकी एंटीजन कार्ड से जांच हुई। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। अब अस्पताल प्रबंधन ने आरटीपीसीआर जांच कराने का निर्देश दिया है। उसकी रिपोर्ट तीन से पांच दिन बाद मिलेगी। तब तक उनकी डायलिसिस नहीं हो पाएगी।

बीआरडी के चक्कर लगा रहे हैं सुजीत
नौसड़ निवासी सुजीत के पिता बीते चार साल से किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं। उनकी हफ्ते में तीन बार डायलिसिस होती है। वह जिला अस्पताल में पंजीकृत भी हैं। सोमवार को उन्हें कोविड जांच कराने के लिए निर्देशित किया गया। उनकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई है। इस रिपोर्ट के बाद जिले के अधिकांश डायलिसिस सेंटरों के दरवाजे उनके लिए बंद हो गए। डायलिसिस के लिए अब वह बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चक्कर काट रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में आठ बेड का डायलिसिस यूनिट है। यह फुल है। सुजीत ने पैनेशिया में भी संपर्क किया है।

खून चढ़वाने में है संक्रमण का खतरा
थैलेसीमिया के मरीजों के लिए भी मुसीबत कम नहीं हुई है। उन्हें महीने में एक से दो बार खून चढ़वाना पड़ता है। इसके लिए वह ब्लड बैंक जाते हैं। जहां पर संक्रमण का खतरा है। खोवा मंडी गली में दुकान चलाने वाले संजय गर्ग का बेटा थैलेसीमिया का मरीज है। संजय ने बताया कि ब्लड चढ़ाने से पहले अस्पताल कोरोना निगेटिव की रिपोर्ट मांग रहे हैं। हर बार ब्लड चढ़ाने से पहले कोविड जांच करानी पड़ रही है। राहत है कि अभी तक बच्चा पॉजिटिव नहीं मिला है। अगर वह पॉजिटिव हो जाए तो कहां ब्लड चढ़ेगा इसका कोई इंतजाम नहीं है।

पांच दिन में तीन मरीज मिले संक्रमित
जिला अस्पताल में 12 बेड का डायलिसिस यूनिट है। यहां रोजाना 36 लोगों की डायलिसिस की जाती है। डायलिसिस यूनिट के प्रबंधक अरुण यादव ने बताया कि यूनिट में संक्रमण के प्रसार का खतरा बना रहता है। डायलिसिस से पूर्व रैंडम तरीके से कुछ मरीजों की एंटीजन कार्ड से जांच करते हैं। कोशिश करते हैं कि हर डायलिसिस कराने वाले की महीने में कम से कम एक से दो बार जांच हो जाए। इसके कारण संक्रमित भी मिलते हैं। बीते पांच दिनों में डायलिसिस कराने पहुंचे तीन लोग संक्रमित मिले हैं। इसमें दो एंटीजन और एक आरटीपीसीआर से संक्रमित हैं। एंटीजन से पॉजिटिव वालों को आरटीपीसीआर कराने की सलाह दी गई है। तब तक इनकी डायलिसिस रोक दी गई है।

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