सालों से तेंदुआ का प्रमाण नहीं, पर पेड़ पर टांग आए उसके भोजन के लिए मृत चीतल

by bharatheadline

न हिसंक वन्यप्राणी का पेट भरा न मृत चीतल का हो सका अंतिम संस्कार

सड़ गया चीतल का षव और पड़ गए कीड़े, पंचनामा बना कर कर ली कत्तव्यों से इत्तीश्री


रायगढ़. गर्मी के दिनों में अक्सर वन्यप्राणी जंगल से भटक कर गांव के करीब पहुंच जाते हैं। ऐसे में कई दफे वे कुत्तों का षिकार बन जाते हैं, तो कई बार अन्य घटना से उनकी मौत हो जाती है। ऐसे में उनके षव को जला दिया जाता है, लेकिन उच्चाधिकारियों ने ऐसी स्थिति को देखते हुए यह आदेष निकाला कि सेंचुरी क्षेत्र में अगर ज्ञात कारणों से किसी वन्यप्राणी की मौत होती है, तो उसके षव को जलाया नहीं जाए। बल्कि उसे तेंदुआ व अन्य हिसंक वन्यप्राणी का भोजन बनाया जाए और ऐसे स्थान पर मृत वन्यप्राणी को रखा जाए। जहां हिसंक प्राणी आसानी से पहुंच जाए और उसे खाकर अपना पेट भर ले, पर रायगढ़ रेंजर राजेन्द्र कुमार साहू ने कुत्तों के हमले से मरे चीतल को ऐसे जंगल में रख दिया, जहां कई सालों से न तो तेंदुआ का कोई प्रमाण मिला और न ही भालू को छोड़कर किसी अन्य हिसंक वन्यप्राणी की यहां पुष्टि हो सकी। बंगुरसिया के जंगल कक्ष क्रमांक 915 में वह मृत चीतल पिछले चार दिनों से वहीं पड़े पड़े सड़ गया। विभागीय कर्मचारियों ने बताया कि अब तो उसके षरीर में कीड़े भी लग चुके हैं। ऐसे में वह मृत चीतल न तो किसी का पेट भर सका और न ही उसका अंतिम संस्कार हो सका। इसे लेकर अब विभाग के कर्मचारियों के बीच कई तरह की चर्चाए हैं और कहा जा रहा है कि वन्यप्राणियों की जान बचा तो पा नहीं रहे अब उन्हें मरा जंगल में सड़ने के लिए छोड़ दिया जा रहा है।
एक बार फिर लापरवाही उजागर
रायगढ़ वन परिक्षेत्र में एक बार फिर से रेंज अफसर की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। इससे पहले रेल कॉरीडोर में कूप जलना, लाम्हीदरहा प्लांटेषन में दावानल, कोरियादादर में अतिक्रमण सहित अन्य मामले अखबारों के सुर्खियों में रहे हैं। वहीं अब बताया जा रहा है कि रेंज स्तर के अधिकारी के द्वारा बिना पुष्टि किए ही बंगुरसिया के जंगल में मृत चीतल को रख दिया गया। जबकि बंगुरसिया पष्चिम के वनकर्मियों से मोबाईल पर चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि पिछले पांच छह सालों से यहां तेंदुआ व लकड़बग्घा का कोई प्रमाण नहीं मिला है और न ही इसकी पुष्टि हो सकी है। इसके बाद भी इस तरह मृत चीतल को जंगल में छोड़ना विभाग के अधिकारियों की लापरवाही को उजागर कर रही है।
बिना षिकार किए षिकारियों की हो जाएगी मौज
विभागीय जानकरों का यह भी कहना है कि तेंदुआ व हिसंक वन्यप्राणियों की बिना पुष्टि और चौबिस घंटे की बिना निगरानी इस तरह मृत वन्यप्राणियों को घने जंगलो में छोड़ दिया जाता है, तो षिकारियों व वन अपराध से जुड़े लोगांे की मौज हो जाएगी। बिना षिकार ही उन्हें अपना मनपसंद षिकार मृत हालत में बंधा मिलेगा। बताया जा रहा है कि बंगुरसिया के कक्ष क्रमांक 915 में जहां मृत चीतल को छोड़ा गया था, वहां सिर्फ सुबह व षाम को देखकर वनकर्मी लौट आते हैं।
हो सकती है वनकर्मियों पर कार्रवाई
विभागीय सूत्रों ने बताया कि इस तरह की लापरवाही से अब बड़ी कार्रवाई विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा रायगढ़ रेंज में की जा सकती है। चीतल को इस तरह सड़ने के लिए जंगल में छोड़ने संबंधी इस मामले सहित दावानल से जंगल को बचाने में की गई लापरवाही की षिकायत भी उच्च विभाग में किए जाने की तैयारी अब वन व वन्यप्राणी प्रेमियों के द्वारा की जा रही है। जल्द ही इस मामले की उच्च स्तर पर षिकायत हो सकती है। ऐसे में आने वाले समय में रायगढ़ वन मंडल में लापरवाह अधिकारी व कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई से इंकार नहीं किया जा सकता है।
वर्सन
मृत चीतल प्रजाति के वन्यप्राणी को तेंदुआ व अन्य हिसंक प्राणी के भोजन के लिए ऐसे स्थान पर छोड़ना है, जहां उनकी मौजूदगी हो। यह आदेष अभ्यारण्य के लिए आया था, पर सेंचुरी के अलावा अगर कहीं तेंदुआ है, तो वहां भी उसके पेट भरने के लिए अपनी निगरानी में रख सकते हैं। बंगुरसिया में मृत चीतल को ऐसा रखा गया है इसकी रिपोर्ट रेंजर ने अभी नहीं किया हैं। मैं इनसे बात कर लेता हूं और अगर वहां हिसंक वन्यप्राणी नहीं है, तो मृत चीतल के षव को मगंवा कर उसका अंतिम संस्कार कराया जाएगा और आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डॉ प्रणय मिश्रा
वनमंडलाधिकारी, रायगढ़ वन मंडल

Related Posts

Leave a Comment